Abhilash Tamatar ki Kheti: बीज से कटाई तक पूरी गाइड (Seminis ka Abhilash Tamatar)

Abhilash Tamatar ki Kheti

  • Abhilash tamatar ki kheti आज कई इलाकों में पसंद की जाती है क्योंकि यह हाइब्रिड श्रेणी में आती है और बाजार में अच्छी डिमांड मिलती है।
  • अगर आप abhilash tamatar seeds या abhilash tamatar bij से खेती शुरू करना चाहते हैं, तो सरल तरीकों और सही मैनेजमेंट से उच्च गुणवत्ता का उत्पादन ले सकते हैं।
  • कुछ किसान Seminis ka Abhilash tamatar इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग बैच/रीजन के हिसाब से विशेषताएं बदल सकती हैं, इसलिए पैकेट लेबल और स्थानीय एग्री-एक्सपर्ट/डीलर से पुष्टि जरूर करें।

जलवायु और मृदा

  • तापमान: 20–30°C सबसे उपयुक्त; 10°C से नीचे या 35°C से ऊपर फल-सेट कम हो सकता है।
  • मिट्टी: अच्छी जलनिकास वाली दोमट/बलुई-दोमट; pH 6.0–7.5 आदर्श।
  • धूप: प्रतिदिन 6–8 घंटे सीधी धूप आवश्यक।
  • जलभराव से बचें; उठी हुई क्यारियाँ (raised beds) बेहतर रहती हैं।

बुवाई का समय

  • उत्तर भारत:
    • रबी: अक्तूबर–नवंबर में नर्सरी, दिसंबर–जनवरी रोपाई
    • खरीफ: जून–जुलाई
    • स्प्रिंग–समर: जनवरी–फरवरी नर्सरी
  • दक्षिण/पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र): साल में 2–3 चक्र संभव; मानसून से बचाव और ड्रिप जरूरी।
  • पूर्वी भारत: जुलाई–अगस्त (खरीफ), नवंबर–दिसंबर (रबी)
  • पहाड़ी क्षेत्र: मार्च–अप्रैल नर्सरी, मई–जून रोपाई

नोट: स्थानीय मौसम, तापमान और फ्रोस्ट/हीटवेव के अनुसार तिथियों में समायोजन करें।

बीज का चुनाव और मात्रा

  • बीज: प्रमाणित abhilash tamatar bij या abhilash tamatar seeds ही लें। पैकेट की अंकुरण क्षमता, ट्रीटमेंट और बैच डेट देखें।
  • मात्रा (हाइब्रिड): लगभग 50–60 ग्राम प्रति एकड़ (नर्सरी के लिए) पर्याप्त रहती है।
  • बीजोपचार: Trichoderma/beneficial microbes या लेबल-निर्देशित ट्रीटमेंट उपयोग करें।

नर्सरी मैनेजमेंट

  • माध्यम: 1 भाग मिट्टी + 1 भाग कंपोस्ट/वर्मी + 1 भाग रेत/कोकोपीट; अच्छी तरह छनाई और साफ।
  • बेड/ट्रे: प्री-स्टरलाइज्ड media में प्रो-ट्रे (plug trays) बेहतर अंकुरण देता है।
  • बुवाई गहराई: 0.5–1.0 सेमी; हल्की सिंचाई।
  • छायान_NET: 35–50% shade net; पीला/नीला चिपचिपा ट्रैप (sticky traps) लगाएं।
  • रोग/कीट से बचाव: नर्सरी में साप्ताहिक बायो-फंजीसाइड (Trichoderma/ Bacillus-based) और नीम-आधारित स्प्रे।
  • रोपाई आयु: 20–25 दिन की स्वस्थ पौध (4–5 सच्चे पत्ते) रोपें।

खेत की तैयारी

  • जुताई: 1–2 डीप प्लाउइंग + 1–2 हर्रोइंग; मिट्टी भुरभुरी बनाएं।
  • कार्बनिक खाद: 8–10 टन गोबर की सड़ी खाद/कम्पोस्ट प्रति एकड़ मिलाएं।
  • सोलराइजेशन: गर्मियों में 3–4 हफ्ते पारदर्शी पॉलीथिन से ढककर रोग/नीमाटोड दबाएं (जहां संभव)।
  • बेड्स: 1–1.2 मीटर चौड़े उठे हुए बेड; ड्रिप लाइन और मल्चिंग शीट (ब्लैक/सिल्वर) लगाने से नमी और खरपतवार नियंत्रण होता है।

रोपाई दूरी और पौध जनसंख्या

  • दूरी: पंक्ति से पंक्ति 90–120 सेमी; पौधा से पौधा 45–60 सेमी (हाइब्रिड के लिए सामान्य गाइड)
  • पौधे: लगभग 6,000–9,000 पौधे प्रति एकड़, किस्म और ट्रेनिंग सिस्टम पर निर्भर
  • रोपाई शाम को करें; रूट-ज़ोन में फॉस्फोरस/रूट-स्टिमुलेंट का हल्का ड्रेंच फायदा देता है।

सिंचाई प्रबंधन

  • पहला पानी: रोपाई के तुरंत बाद।
  • आवृत्ति: ठंडे मौसम में 6–7 दिन, गर्म/रेतीली मिट्टी में 3–4 दिन; ड्रिप irrigation सबसे अच्छा।
  • क्रिटिकल स्टेज: फूल बनने से फल-सेट और फल विकास तक नमी स्थिर रखें।
  • जलभराव से बचें; हल्की–बारंबार सिंचाई बेहतर।

पोषण प्रबंधन (NPK और सूक्ष्म पोषक)

  • सिफारिश (सामान्य): लगभग N 60 किग्रा, P2O5 30–40 किग्रा, K2O 30–40 किग्रा प्रति एकड़/सीजन (मिट्टी परीक्षण के अनुसार समायोजित करें)।
  • बेसल: कुल NPK का 25–30% + जिप्सम/सुपरफॉस्फेट (यदि P कम हो) + 1–2 किग्रा/एकड़ बोरोन 10–15 किग्रा/हेक्टेयर के समकक्ष साल भर में स्प्लिट डोज़ (लेबल अनुसार)।
  • टॉप ड्रेस/फर्टिगेशन:
    • वेजिटेटिव: N प्रधान (उदा. urea/CAN)
    • फल-सेट/डेवलपमेंट: K बढ़ाएं (MOP/soluble K); Ca और Mg संतुलित रखें।
  • कैल्शियम-बोरॉन: ब्लॉसम एंड रॉट रोकथाम के लिए कैल्शियम नाइट्रेट फर्टिगेशन और बोरोन का लो-डोज फोलियर स्प्रे लाभकारी।
  • माइक्रोज़: Zn, Fe, Mg की कमी दिखे तो chelated माइक्रो-मिक्स का स्प्रे।

सपोर्ट, प्रूनिंग और फूल प्रबंधन

  • स्टेकिंग/ट्रेलिस: बांस/जीआई वायर से पौधा संभालें; फल साफ और रोग कम लगते हैं।
  • प्रूनिंग: निचली 3–4 साइड शूट निकालना, जमीन छूती पत्तियों को हटाना; हवा–रोशनी बेहतर।
  • फूल-सेट: बहुत अधिक गर्मी/ठंड में फल-सेट घटे तो हल्की सिंचाई, माइक्रो स्प्रे, और K–Ca सपोर्ट मददगार।

खरपतवार नियंत्रण

  • प्लास्टिक मल्च से 70–80% तक नियंत्रण संभव।
  • हाथ से गुड़ाई/खुरपी; शुरुआती 30–45 दिन विशेष ध्यान।

कीट और रोग प्रबंधन (IPM)

  • निगरानी: प्रति एकड़ 8–10 पीले/नीले स्टिकी ट्रैप; Helicoverpa के लिए फेरोमोन ट्रैप।
  • प्रमुख कीट:
    • फल बेधक (फ्रूट बोरर), सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माइट्स, लीफ माइनर
    • प्रबंधन: नीम-आधारित बायोपेस्टिसाइड, Bt/HNPV, और आवश्यकता पर लेबल-अनुसार चयनित एक्टिव-इंग्रीडिएंट रोटेशन (IRAC मोड बदलते रहें)।
  • प्रमुख रोग:
    • प्रारंभिक झुलसा (Early blight), झुलसा (Late blight), पत्ती धब्बा, बैक्टीरियल विल्ट, वायरल रोग (ToLCV)
    • प्रबंधन: रोग-मुक्त नर्सरी, फसल चक्र (Solanaceae से विराम), Trichoderma/PGPR, अच्छी निकास, कॉपर/फॉस्फोनेट/बायो-फंजीसाइड का प्रिवेंटिव स्प्रे, सफेद मक्खी नियंत्रण।
  • स्वच्छता: संक्रमित पत्ते/फलों को हटाकर नष्ट करें; खेत किनारे जंगली सोलानेशियस खरपतवार न रखें।
  • स्प्रे से पहले: स्थानीय कृषि विशेषज्ञ/लेबल निर्देश अनिवार्य रूप से देखें।

कटाई और ग्रेडिंग

  • पहली तुड़ाई: रोपाई के 60–75 दिन बाद, जलवायु और हाइब्रिड पर निर्भर।
  • स्टेज:
    • लोकल मार्केट: पिंकर/टर्निंग स्टेज
    • दूर की मंडी: ब्रेकर स्टेज
  • ग्रेडिंग: साइज, चमक, बिना दरार/दाग; साफ क्रेट में पैक करें।
  • पोस्ट-हार्वेस्ट: छांव में प्री-कूलिंग, चोट से बचाव, साफ पानी से हल्का धोन/वाइप।

उपज, लागत–लाभ (सामान्य संकेत)

  • हाइब्रिड टमाटर में अच्छे प्रबंधन पर उच्च उपज की संभावना रहती है; वास्तविक उपज जलवायु, मिट्टी, कीट–रोग और देखभाल पर निर्भर करती है।
  • इनपुट कॉस्ट घटाने के लिए: ड्रिप + मल्च + IPM + समय पर पोषण से बेहतर लाभ मिल सकता है।

बाजार और कीमत

  • मार्केटिंग: स्थानीय मंडी, रिलेशन-आधारित थोक विक्रेता, होटल/कैंटीन/रीटेल बॉक्स सप्लाई।
  • बेहतर दाम के लिए: ग्रेडिंग, साफ पैकिंग, नियमित सप्लाई शेड्यूल, और फसल को त्यौहार/उच्च मांग सीजन में प्लान करें।

राज्य/क्षेत्र अनुसार टिप्स

  • महाराष्ट्र/कर्नाटक: मॉनसून में ड्रेनेज और फाइटोफ्थोरा रोकथाम; रबी–समर में हीट/स्प्रिंकलर मिस्टिंग।
  • उत्तर प्रदेश/बिहार: सर्दी में पाला से बचाव (एग्रोनेट/मल्च), गर्मियों में शेड नेट स्प्रे लाइन।
  • राजस्थान/मध्य भारत: क्षारीय मिट्टी में सल्फर/जिप्सम और ऑर्गेनिक मैटर बढ़ाएं; ड्रिप से जल दक्षता।
  • तमिलनाडु/आंध्र: साल भर चक्र; वायरल रोग प्रबंधन हेतु नर्सरी नेटहाउस और सफेद मक्खी नियंत्रण जरूरी।
  • पहाड़/हिल्स: देर ठंड/कोहरा में फफूंदी रोग रोकथाम के प्रिवेंटिव स्प्रे और बेहतरीन निकास।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


Q1: Abhilash tamatar ka bij कहाँ से लें?

प्रमाणित सप्लायर/लाइसेंस्ड डीलर से abhilash tamatar bij या abhilash tamatar seeds लें। पैकेट लेबल, अंकुरण दर और बैच/वैलिडिटी जांचें।

Q2: Seminis ka Abhilash tamatar क्या अलग है?

कुछ क्षेत्रों में Seminis ब्रांड का Abhilash tomato हाइब्रिड उपलब्ध बताया जाता है। विशिष्ट गुण (पकने के दिन, फल आकार, सहनशीलता) बैच/रीजन के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए अपने इलाके के अधिकृत डीलर/एक्सटेंशन अधिकारी से पुष्टि करें और पैकेट पर दिए निर्देश मानें।

Q3: रोपाई दूरी क्या रखें?

आमतौर पर 90–120 सेमी (पंक्ति) और 45–60 सेमी (पौधा) हाइब्रिड के लिए उपयुक्त है; ट्रेलिस/प्रूनिंग पर निर्भर।

Q4: कौन-सी खाद जरूरी है?

मिट्टी परीक्षण के अनुसार NPK दें; Ca, B, Mg और Zn की कमी दिखाई दे तो सप्लीमेंट करें। ऑर्गेनिक मैटर बढ़ाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है।

Q5: वायरल रोग से कैसे बचें?

नर्सरी नेटहाउस, पीले स्टिकी ट्रैप, नीम-आधारित स्प्रे, सफेद मक्खी नियंत्रण, संक्रमित पौध तुरंत हटाएं, फसल चक्र अपनाएं।

  1. क्विक चेकलिस्ट
  • प्रमाणित abhilash tamatar bij/abhilash tamatar seeds
  • नर्सरी स्वच्छ, शेडनेट और स्टिकी ट्रैप
  • उठी हुई क्यारियाँ + ड्रिप + मल्च
  • सही दूरी, स्टेकिंग और हल्की प्रूनिंग
  • संतुलित NPK + Ca–B सपोर्ट
  • IPM: ट्रैप, बायो-एजेंट्स, रोग-रोधी स्वच्छता
  • समय पर कटाई, ग्रेडिंग और साफ पैकिंग

महत्वपूर्ण अस्वीकरण

  • अलग-अलग कंपनियों के हाइब्रिड/बैच में गुण बदल सकते हैं। Seminis ka Abhilash tamatar सहित किसी भी ब्रांड के लिए पैकेट लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ/डीलर की सलाह को प्राथमिकता दें।
  • कीटनाशक/फफूंदनाशी का उपयोग हमेशा लेबल निर्देश और स्थानीय नियमों के अनुसार करें।

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