कपास में खाद प्रबंधन का महत्व (Importance of Cotton Fertilizer Management)
कपास भारत की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। भारत में लगभग 360 लाख गांठ कपास का उत्पादन होता है, जो विश्व के कुल उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत है। अच्छी पैदावार के लिए कपास में खाद (Cotton mein Khad) का सही समय पर सही मात्रा में उपयोग बेहद जरूरी है। कपास की फसल को अपनी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है।
बुवाई के समय बेसल डोज (Basal Dose at Sowing Time)
पहला बेसल डोज (1-20 दिन) – First Basal Dose
कपास में खाद का पहला बेसल डोज बुवाई के समय देना चाहिए:
- यूरिया (Urea): 25 किलो प्रति एकड़
- DAP (डीएपी): 40 किलो प्रति एकड़
- MOP पोटाश (Potash): 40 किलो प्रति एकड़
- सल्फर (Sulphur): 4 किलो प्रति एकड़
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): 4 किलो प्रति एकड़
- नीमकेक (Neem Cake): 50-60 किलो प्रति एकड़
- गोबर की खाद (FYM): 2-3 टन प्रति एकड़
नोट: यदि एसएसपी (SSP) से खाद देना चाहते हैं, तो 100 किलोग्राम एसएसपी, 20 किलोग्राम यूरिया और 15 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें।
दूसरा बेसल डोज (25-35 दिन) – Second Basal Dose
बुवाई के 25-35 दिन बाद:
- यूरिया: 40 किलो प्रति एकड़
- DAP: 60 किलो प्रति एकड़
- MOP पोटाश: 30 किलो प्रति एकड़
- बेन्टोनाइट सल्फर: 10 किलो प्रति एकड़
सिंचाई के साथ खाद प्रबंधन (Fertilizer with Irrigation)
पहले पानी पर (First Irrigation)
- यूरिया: 30 किलोग्राम प्रति एकड़
- पोटाश: 10-15 किलोग्राम प्रति एकड़
- सल्फर: 2-3 किलोग्राम प्रति एकड़
दूसरे और तीसरे पानी पर (Second & Third Irrigation)
हर पानी पर 25-30 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से डालें।
ड्रिप सिंचाई के साथ खाद शेड्यूल (Fertilizer Schedule with Drip)
यदि ड्रिप के माध्यम से खाद देना चाहते हैं, तो हर 30-40 दिन में:
- ह्यूमिक एसिड (Humic Acid): 500 ग्राम प्रति एकड़
- मैग्नेशियम सल्फेट: 5 किलो प्रति एकड़
- फेरस सल्फेट: 5 किलो प्रति एकड़
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: 5 किलो प्रति एकड़
फसल की विभिन्न अवस्थाओं में घुलनशील खाद (Water Soluble Fertilizers at Different Stages)
बढ़वार अवस्था (35-45 दिन) – Vegetative Stage
- NPK 19:19:19: 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
- ह्यूमिक एसिड: 2-3 मिली प्रति लीटर पानी
- चेलेटेड माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: 1 ग्राम प्रति लीटर पानी
फूल आने की अवस्था (70-75 दिन) – Flowering Stage
कपास में फूल आने की अवस्था में पोटैशियम नाइट्रेट (NPK 13:0:45) को 200 लीटर पानी में घोलकर 2 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से हर 15 दिन में छिड़काव करें।
साथ में:
- बोरॉन (Boron): 100 ग्राम प्रति एकड़
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: 1-1.5 किलोग्राम प्रति एकड़
फूलों के झड़ने की समस्या में (Flower Drop Problem)
- MKP (मोनो पोटेशियम फॉस्फेट) 00:52:34: 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
- जिबरेलिक एसिड (Gibberellic Acid) 0.001%: 2-3 मिली प्रति लीटर पानी
नैनो यूरिया का उपयोग (Nano Urea Usage)
नैनो यूरिया में 4% नाइट्रोजन होता है और इसके कण 20-50 नैनो मीटर के आकार के होते हैं। अनाज, तेल, सब्जी और कपास जैसी फसलों में दो बार नैनो यूरिया का उपयोग किया जा सकता है।
नैनो यूरिया की मात्रा और समय (Nano Urea Dose & Time)
पहला छिड़काव: अंकुरण के 30-35 दिन बाद
- नैनो यूरिया: 2-4 मिली प्रति लीटर पानी (कपास जैसी नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता वाली फसलों में 4 मिली प्रति लीटर)
दूसरा छिड़काव: फूल आने के 1 सप्ताह पहले
- नैनो यूरिया: 2-4 मिली प्रति लीटर पानी
नैनो यूरिया के फायदे (Benefits of Nano Urea)
- पारंपरिक यूरिया की तुलना में 80% से अधिक उपलब्धता
- पर्यावरण के अनुकूल और मिट्टी को दूषित नहीं करता
- परिवहन और भंडारण में आसान
- एक 500 मिली की बोतल सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर पोषक तत्व प्रदान करती है
- उत्पादन वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और समाधान (Micronutrient Deficiency Symptoms & Solutions)
जिंक की कमी के लक्षण (Zinc Deficiency Symptoms)
जिंक की कमी से पत्तियों में पीले धब्बे आते हैं और पत्तियों की किनारों पर विकृति देखी जा सकती है। पौधे की ऊपरी पत्तियाँ और शिराएं हरितहीनता प्रदर्शित करने लगती हैं और अंततः प्रभावित पत्तियाँ सफेद हो जाती हैं।
अन्य लक्षण:
- पौधों की वृद्धि रुकना
- फूलों और बीज का विकास कम होना
- पत्तियों का रोसेट के रूप में छोटा और विकृत होना
जिंक की कमी का समाधान (Zinc Deficiency Solution)
मिट्टी में उपयोग:
- जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट (ZnSO4): 5 किलोग्राम प्रति एकड़
छिड़काव के लिए:
- Zn 12% EDTA: 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
महत्वपूर्ण: जिंक को खेत तैयारी में आखरी जुताई से पहले ही डालें। DAP और SSP के साथ जिंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये आपस में रिएक्शन करते हैं।
बोरॉन की कमी के लक्षण (Boron Deficiency Symptoms)
बोरॉन की कमी से पत्तियों की आकृति विकृत हो जाती है और उनका विकास सही से नहीं होता। फूलों और फलों का गिरना आमतौर पर कपास में देखा जाता है।
अन्य लक्षण:
- जड़ों का विकास विकृत होना
- पौधा झाड़ीनुमा हो जाना
- कलियां, फूल और फल कम बनना
- फूलों में निषेचन की क्रिया बाधित होना
बोरॉन की कमी का समाधान (Boron Deficiency Solution)
छिड़काव के लिए:
- बोरॉन 20% (Di-Sodium Tetra Borate Pentahydrate): 100 ग्राम प्रति एकड़ या 1-2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
समय: फूल आने की अवस्था में एनपीके 13:0:45 के साथ मिलाकर छिड़काव करें
जैविक खाद और ऑर्गेनिक इनपुट्स (Organic Fertilizers & Inputs)
कॉटनसीड मील (Cottonseed Meal)
कॉटनसीड मील कपास के बीज से तेल निकालने के बाद बचा हुआ पदार्थ है, जो एक उत्कृष्ट जैविक खाद है।
NPK मूल्य: 6-2-1 (नाइट्रोजन 6%, फास्फोरस 2%, पोटाश 1%)
लाभ:
- प्राकृतिक रूप से मिट्टी को अम्लीय बनाता है
- लाभकारी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को बढ़ावा देता है
- जड़ों का विकास बेहतर होता है
- धीरे-धीरे पोषक तत्व छोड़ता है
- मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाता है
उपयोग विधि:
- सामान्य फसलों के लिए: 8-10 पाउंड प्रति 100 वर्ग फीट
- पौधों के चारों ओर 2-3 इंच की परत लगाएं
अन्य जैविक खाद (Other Organic Inputs)
वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost):
- मात्रा: 2-3 टन प्रति एकड़
- गोबर की खाद के विकल्प के रूप में उपयोग कर सकते हैं
नीम की खली (Neem Cake):
- मात्रा: 40-60 किलोग्राम प्रति एकड़
- कीट नियंत्रण में भी सहायक
माइकोराइजा (Mycorrhiza):
- मात्रा: 4 किलोग्राम प्रति एकड़
- जड़ों के विकास और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक
प्रोम (फॉस्फेट युक्त जैविक खाद):
- मात्रा: 50 किलोग्राम प्रति एकड़
कपास में संतुलित पोषण का महत्व (Importance of Balanced Nutrition)
कपास की फसल में उर्वरकों की सही मात्रा को उचित समय पर देना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। फसल के विकास और पैदावार में वृद्धि के लिए उपयुक्त पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा की आवश्यकता होती है।
हाइब्रिड और बीटी कपास के लिए (For Hybrid & BT Cotton)
- नाइट्रोजन (Nitrogen): 150 किलोग्राम प्रति एकड़
- फॉस्फोरस (Phosphorus): 75 किलोग्राम प्रति एकड़
- पोटेशियम (Potassium): 40 किलोग्राम प्रति एकड़
- सल्फर (Sulphur): 25 किलोग्राम प्रति एकड़
महत्वपूर्ण सुझाव और सावधानियां (Important Tips & Precautions)
खाद प्रबंधन के सुझाव
- मिट्टी परीक्षण करें: खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं
- संतुलित उपयोग: किसी एक खाद पर अधिक निर्भर न रहें
- सही समय: हर खाद को उसके निर्धारित समय पर ही डालें
- पानी की उपलब्धता: खाद देने के बाद उचित नमी बनाए रखें
- मौसम का ध्यान: बारिश से ठीक पहले खाद न डालें
सावधानियां
- जिंक और DAP को एक साथ न मिलाएं
- नैनो यूरिया का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें
- घुलनशील खाद हमेशा ताजे पानी के साथ मिलाएं
- अधिक मात्रा में यूरिया से बचें, यह नुकसानदायक हो सकता है
- जैविक खाद को रासायनिक खाद के साथ संतुलित रूप से प्रयोग करें
निष्कर्ष (Conclusion)
कपास में खाद प्रबंधन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाद का उपयोग करना जरूरी है। रासायनिक खाद के साथ-साथ जैविक खाद का संतुलित उपयोग न केवल अच्छी पैदावार देता है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी बनाए रखता है। नैनो यूरिया जैसी नई तकनीकों का उपयोग करके आप कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक और बोरॉन पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि इनकी कमी से फसल की उपज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
याद रखें कि हर खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खाद का उपयोग करें। स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेना भी फायदेमंद रहता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी और जलवायु के अनुसार खाद की मात्रा में बदलाव हो सकता है। अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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