कपास के कीट, Integrated Pest Management और जैविक नियंत्रण: किसानों के लिए संपूर्ण गाइड
कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है, जिसे ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है। लेकिन कीटों का प्रकोप इस फसल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कपास में लगभग 162 प्रकार के कीट पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ बेहद हानिकारक होते हैं। आइए जानें कपास के प्रमुख कीटों और उनके एकीकृत प्रबंधन (Integrated Pest Management) के बारे में विस्तार से।
कपास के प्रमुख कीट और उनकी पहचान | Cotton Pest Control
1. गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) – कपास का सबसे खतरनाक कीट
गुलाबी सुंडी या पिंक बॉलवर्म (Pectinophora gossypiella) कपास की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला कीट है। यह कीट कपास के उत्पादन में 50-60% तक की कमी कर सकता है।
पहचान के लक्षण:
- लार्वा गुलाबी रंग का होता है जो टिंडे के अंदर पाया जाता है
- टिंडों पर गोल छेद दिखाई देते हैं
- कपास की रुई अंदर से धब्बेदार और काली हो जाती है
- बीज खराब हो जाते हैं और रेशों की गुणवत्ता घट जाती है
गुलाबी सुंडी नियंत्रण के उपाय:
सांस्कृतिक नियंत्रण:
- गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें (मई-जून में)
- संक्रमित टिंडों को इकट्ठा करके नष्ट कर दें
- फसल अवशेषों को जला दें या गहराई में दबा दें
- समय पर बुवाई करें (मई-जून में)
जैविक नियंत्रण:
- ट्रिकोग्रामा चिलोनिस और ट्रिकोग्रामा ब्रासिकी परजीवी का छोड़ना (4-5 बार, 15 दिन के अंतराल पर)
- क्रिसोपर्ला कार्निया (ग्रीन लेसविंग) का उपयोग
- ब्यूवेरिया बेसियाना जैव कीटनाशक @ 2 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव
फेरोमोन ट्रैप का उपयोग:
- गुलाबी सुंडी की निगरानी और नर कीटों को पकड़ने के लिए फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) 5 नग प्रति एकड़ लगाएं
- ट्रैप को फसल की ऊंचाई के बराबर रखें
- हर 25-30 दिन में ल्यूर (Lure) बदलें
रासायनिक नियंत्रण:
- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC @ 150 मिली प्रति एकड़
- स्पाइनोसैड 45% SC @ 100 मिली प्रति एकड़
- इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @ 80 ग्राम प्रति एकड़
- थायोमेथोक्सम 12.6% + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.5% ZC @ 200 मिली प्रति एकड़
2. सफेद मक्खी या व्हाइटफ्लाई (Whitefly)
सफेद मक्खी रस चूसने वाला कीट है जो पत्तियों की निचली सतह पर रहता है। यह कीट 50-60% तक उत्पादन में कमी कर सकता है और पत्ती मरोड़ वायरस (Leaf Curl Virus) फैलाता है।
पहचान:
- छोटे सफेद पंखों वाली मक्खी (1-2 मिमी)
- पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ (हनीड्यू)
- काली सूटी मोल्ड का विकास
- पत्तियां पीली पड़ जाना और मुड़ना
व्हाइटफ्लाई नियंत्रण:
जैविक नियंत्रण:
- ब्यूवेरिया बेसियाना @ 5 ग्राम प्रति लीटर
- नीम का तेल (3000 PPM) @ 5 मिली प्रति लीटर पानी
- पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं (10-12 प्रति एकड़)
रासायनिक नियंत्रण:
- डाईफेंथ्युरॉन 50% WP @ 200 ग्राम प्रति एकड़
- फ्लोनिकामिड 50% WG @ 80 ग्राम प्रति एकड़
- इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 100 मिली प्रति एकड़
- स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC @ 200 मिली प्रति एकड़
3. जैसिड (Jassid) – हरा तेला
जैसिड या लीफ हॉपर हरे रंग का छोटा कीट है जो पत्तियों से रस चूसता है और फसल को कमजोर बना देता है।
नियंत्रण:
- इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 40-50 मिली प्रति एकड़
- थायोमेथोक्सम 25% WG @ 40 ग्राम प्रति एकड़
- एसीटामिप्रिड 20% SP @ 50 ग्राम प्रति एकड़
4. थ्रिप्स (Thrips)
थ्रिप्स छोटे पीले या भूरे रंग के कीट होते हैं जो पत्तियों से रस चूसते हैं और पत्तियों को सिल्वरी या चांदी जैसा बना देते हैं।
नियंत्रण:
- डाईफेंथ्युरॉन 50% WP @ 200 ग्राम प्रति एकड़
- फिप्रोनिल 5% SC @ 400 मिली प्रति एकड़
- नीम आधारित कीटनाशक @ 5 मिली प्रति लीटर
5. हेलिकोवर्पा या अमेरिकन बॉलवर्म (American Bollworm)
हेलिकोवर्पा आर्मीगेरा कपास के टिंडों को छेदकर अंदर की सामग्री खा जाता है। Bt कपास में इसका नियंत्रण अपेक्षाकृत आसान है।
नियंत्रण:
- NPV (Nuclear Polyhedrosis Virus) @ 250 LE प्रति एकड़
- Bt (Bacillus thuringiensis) @ 1 किग्रा प्रति एकड़
- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC @ 60 मिली प्रति एकड़
- फ्लुबेंडियामाइड 20% WG @ 125 ग्राम प्रति एकड़
एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM)
IPM एक व्यापक दृष्टिकोण है जो विभिन्न कीट नियंत्रण विधियों को मिलाकर कीटों का प्रभावी प्रबंधन करता है।
IPM के प्रमुख घटक:
1. सांस्कृतिक नियंत्रण:
- गर्मी में गहरी जुताई (20-25 सेमी गहराई तक)
- फसल चक्र अपनाएं (कपास के बाद गेहूं या दलहनी फसल)
- स्वच्छ खेती – खेत में खरपतवार न रहने दें
- समय पर बुवाई करें
- संतुलित उर्वरक प्रबंधन
2. यांत्रिक नियंत्रण:
- फेरोमोन ट्रैप लगाएं (5-8 प्रति एकड़)
- पीले और नीले स्टिकी ट्रैप लगाएं
- प्रकाश प्रपंच (Light Trap) का उपयोग
- हाथ से लार्वा और संक्रमित भागों को इकट्ठा करके नष्ट करें
3. जैविक नियंत्रण:
- मित्र कीटों का संरक्षण (लेडी बर्ड बीटल, क्रिसोपा, मकड़ी)
- परजीवी और परभक्षी कीटों का प्रयोग
- जैव कीटनाशकों का उपयोग
- बायोपेस्टीसाइड्स का छिड़काव
4. रासायनिक नियंत्रण:
- आवश्यकता आधारित कीटनाशकों का प्रयोग
- ETL (Economic Threshold Level) के आधार पर छिड़काव
- कीटनाशकों का बदल-बदल कर प्रयोग (प्रतिरोधकता से बचने के लिए)
कपास में स्प्रे शेड्यूल (Spray Schedule)
सही समय पर सही कीटनाशक का छिड़काव बेहद जरूरी है। नीचे कपास के लिए अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल दिया गया है:
बुवाई के 30-40 दिन बाद (फूल आने से पहले):
- नीम का तेल 3000 PPM @ 5 मिली/लीटर या
- इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 0.5 मिली/लीटर (रस चूसने वाले कीटों के लिए)
बुवाई के 45-60 दिन बाद (फूल अवस्था):
- डेलीगेट (स्पाइनोसैड) @ 0.5 मिली/लीटर या
- थायोमेथोक्सम 25% WG @ 0.25 ग्राम/लीटर (थ्रिप्स, जैसिड के लिए)
बुवाई के 70-80 दिन बाद (टिंडा बनने की अवस्था):
- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC @ 0.3 मिली/लीटर या
- इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG @ 0.5 ग्राम/लीटर (सुंडी नियंत्रण के लिए)
बुवाई के 90-100 दिन बाद:
- फ्लोनिकामिड 50% WG @ 0.4 ग्राम/लीटर या
- डाईफेंथ्युरॉन 50% WP @ 1 ग्राम/लीटर (सफेद मक्खी के लिए)
बुवाई के 110-120 दिन बाद:
- स्पाइरोमेसिफेन 22.9% SC @ 1 मिली/लीटर (निम्फ नियंत्रण के लिए)
महत्वपूर्ण सुझाव:
- एक ही कीटनाशक का बार-बार प्रयोग न करें
- छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें
- नोजल को पत्तियों की निचली सतह की ओर रखें
- कीटनाशकों को मिलाकर प्रयोग न करें (जब तक विशेष सिफारिश न हो)
Bt कपास में रेसिस्टेंस मैनेजमेंट (Resistance Management in Bt Cotton)
Bt कपास में बैसिलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु का जीन होता है जो कुछ सुंडियों के लिए विषैला होता है। लेकिन समय के साथ कीटों में प्रतिरोधकता विकसित हो सकती है। इसके लिए रेसिस्टेंस मैनेजमेंट बहुत जरूरी है।
रिफ्यूजिया (Refugia) की अवधारणा:
रिफ्यूजिया कीट प्रतिरोधकता प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण रणनीति है। इसमें Bt कपास के साथ नॉन-Bt कपास या अन्य फसल की पंक्तियां लगाई जाती हैं।
रिफ्यूजिया लगाने के नियम:
- Bt कपास के खेत की परिधि पर नॉन-Bt कपास की 5 पंक्तियां या कुल क्षेत्र का 20% (जो भी अधिक हो) लगाएं
- रिफ्यूजिया के रूप में अरहर की फसल भी लगा सकते हैं
- Bt बीज पैकेट में नॉन-Bt बीज या अरहर के बीज होते हैं – उन्हें जरूर लगाएं
रिफ्यूजिया क्यों जरूरी है?
- नॉन-Bt पौधों पर कीट बिना Bt प्रोटीन के संपर्क में आते हैं
- प्रतिरोधकता विकास की गति धीमी हो जाती है
- संवेदनशील कीटों की आबादी बनी रहती है
- Bt तकनीक की दीर्घकालीन प्रभावशीलता बनी रहती है
अन्य प्रतिरोधकता प्रबंधन उपाय:
1. कीटनाशकों का चक्रीकरण:
- एक ही रासायनिक समूह के कीटनाशक बार-बार न डालें
- विभिन्न क्रिया विधि (Mode of Action) वाले कीटनाशकों का प्रयोग करें
- सीजन में अधिकतम 2-3 बार एक ही कीटनाशक का प्रयोग करें
2. IPM का पालन:
- सभी नियंत्रण विधियों का संतुलित प्रयोग करें
- केवल रासायनिक नियंत्रण पर निर्भर न रहें
3. निगरानी:
- नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें
- कीटों की संख्या का रिकॉर्ड रखें
- आर्थिक हानि स्तर (ETL) से नीचे छिड़काव न करें
जैविक नियंत्रण विधियां
जैविक नियंत्रण पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालीन समाधान है।
प्रमुख जैव नियंत्रक:
1. परजीवी:
- ट्रिकोग्रामा चिलोनिस – अंडा परजीवी
- ब्राकॉन हेबेटर – लार्वा परजीवी
- कैम्पोलेटिस क्लोरिडी – सुंडी परजीवी
2. परभक्षी:
- क्रिसोपर्ला कार्निया (ग्रीन लेसविंग)
- कोक्सीनेलिड बीटल (लेडीबर्ड बीटल)
- मकड़ियां
- ड्रैगनफ्लाई
- शिकारी बग
3. रोगजनक सूक्ष्मजीव:
- ब्यूवेरिया बेसियाना (फफूंद)
- मेटारिजियम एनिसोप्ली (फफूंद)
- NPV (Nuclear Polyhedrosis Virus)
- Bt (Bacillus thuringiensis)
जैव कीटनाशकों का प्रयोग:
- नीम आधारित उत्पाद (Azadirachtin 0.03%-3000 PPM)
- NSKE (Neem Seed Kernel Extract) – 5%
- पंचगव्य – 3%
- वर्मीवॉश – 10%
महत्वपूर्ण सावधानियां
- कीटनाशक प्रयोग में सावधानी:
- हमेशा अनुशंसित मात्रा का प्रयोग करें
- सुरक्षा उपकरण (मास्क, दस्ताने, जूते) पहनें
- खाली पात्रों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करें
- हवा की दिशा के विपरीत छिड़काव न करें
- पर्यावरण संरक्षण:
- मित्र कीटों को नुकसान से बचाएं
- फूल खिलने के समय छिड़काव न करें (मधुमक्खियों के लिए)
- जल स्रोतों में कीटनाशक न जाने दें
- फसल सुरक्षा:
- कटाई से 15 दिन पहले कीटनाशकों का प्रयोग बंद कर दें
- अवशेष (Residue) की जांच करवाएं
निष्कर्ष
कपास की फसल को कीटों से बचाने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाना बेहद जरूरी है। केवल रासायनिक नियंत्रण पर निर्भर रहने से कीटों में प्रतिरोधकता विकसित हो जाती है और लागत भी बढ़ जाती है। सांस्कृतिक, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक विधियों का संतुलित प्रयोग करके कीटों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm), सफेद मक्खी (Whitefly), जैसिड और थ्रिप्स जैसे कीटों का सही समय पर पता लगाना और नियंत्रण करना बेहद जरूरी है। फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) की सहायता से शुरुआती पता लगाया जा सकता है। Bt कपास में रिफ्यूजिया (Refugia) लगाकर प्रतिरोधकता प्रबंधन करना दीर्घकालीन सफलता के लिए आवश्यक है।
स्प्रे शेड्यूल (Spray Schedule) का पालन करें, लेकिन आवश्यकता के अनुसार ही छिड़काव करें। जैविक नियंत्रण विधियों को प्राथमिकता दें और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में करें। यही सतत और लाभदायक कपास उत्पादन का मंत्र है।
याद रखें: सफल कीट प्रबंधन के लिए नियमित निगरानी, सही पहचान, और समय पर उचित कार्रवाई जरूरी है। IPM अपनाकर आप कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं और लाभदायक कपास उत्पादन कर सकते हैं।
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