कपास की किस्में 2025: BT, हाइब्रिड, देसी कपास गाइड | Cotton Varieties

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कपास की किस्में, कपास के बीज, BT कपास, हाइब्रिड कपास, देसी कपास (Cotton Varieties)

कपास, जिसे “सफेद सोना” (White Gold) के नाम से जाना जाता है, भारतीय कृषि की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है और यहां 60 लाख से अधिक किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। कपास की सही किस्म का चयन आपकी फसल की सफलता और मुनाफे को सीधे प्रभावित करता है। इस लेख में हम 2025 की टॉप वैरायटी (Top Variety), उन्नत किस्में (Unnath Kismein), क्षेत्रानुसार चयन, BT कपास, हाइब्रिड और देसी कपास की विस्तृत जानकारी देंगे।

कपास की प्रमुख श्रेणियां और रेशे की लंबाई

कपास को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:

1. छोटे रेशे वाली कपास (Short Staple)

इस श्रेणी के रेशों की लंबाई 3.5 सेंटीमीटर से कम होती है। यह मुख्यतः उत्तर भारत के शुष्क क्षेत्रों – हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश में उगाई जाती है। कुल उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 15% है।

2. मध्यम रेशे वाली कपास (Medium Staple)

इसके रेशों की लंबाई 3.5 से 5 सेंटीमीटर तक होती है। यह भारत में सबसे अधिक उगाई जाने वाली कपास है, जो कुल उत्पादन का 45% हिस्सा है। इसे लगभग सभी कपास उत्पादक क्षेत्रों में उगाया जाता है।

3. लंबे रेशे वाली कपास और ELS (Extra Long Staple)

लंबे रेशे वाली कपास के रेशों की लंबाई 5 सेंटीमीटर से अधिक होती है। ELS कपास (Extra Long Staple) में रेशे की लंबाई 30 मिमी या उससे अधिक होती है। यह सबसे उच्च गुणवत्ता वाली कपास मानी जाती है और उच्च कोटि के कपड़ों के निर्माण में इस्तेमाल होती है।

केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने कपास उत्पादकता मिशन (Mission for Cotton Productivity) की घोषणा की है, जिसके तहत ELS कपास के उत्पादन को बढ़ावा देना एक प्रमुख लक्ष्य है। भारत में ELS कपास महाराष्ट्र के सांगली जिले और तमिलनाडु के कोयम्बटूर क्षेत्र में उगाई जाती है।

2025 की टॉप वैरायटी (Top Variety 2025) और उन्नत किस्में

BT कपास की प्रमुख किस्में (BT Cotton Varieties)

बीटी कपास (BT Cotton) एक आनुवंशिक रूप से संशोधित फसल है जिसमें बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis) नामक मिट्टी के जीवाणु का जीन डाला जाता है। यह पौधे को बॉलवर्म (गुलाबी सुंडी, अमेरिकन बॉलवर्म) से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

लोकप्रिय BT कपास किस्में:

  1. RCH 773 और RCH 776 – रासी सीड्स (Rasi Seeds) की ये किस्में उच्च उपज के लिए प्रसिद्ध हैं
  2. ABCH 243, ABCH 4899 – आर्बोरियम हाइब्रिड्स
  3. अंकुर 3224, 3228, 3244 – अंकुर सीड्स की किस्में
  4. MRC 7017 BG-II – मरु कपास अनुसंधान केंद्र की किस्म
  5. रासी 314 – रासी सीड्स की लोकप्रिय किस्म
  6. JKH 1947 – जेके सीड्स की किस्म

क्षेत्रानुसार किस्म चयन (Region-wise Variety Selection)

उत्तर भारत के लिए:

  • HD 107 – हिसार में विकसित, रोग प्रतिरोधी, हरियाणा-पंजाब-राजस्थान के लिए उपयुक्त
  • HD 432 – सूखा सहनशील, उत्तरी भारत के शुष्क क्षेत्रों के लिए

दक्षिण भारत के लिए:

  • RG 18 – उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के लिए, रोग प्रतिरोधी

सिंचित क्षेत्रों के लिए:

  • RCH 134Bt – प्रति एकड़ 11.5 क्विंटल तक उपज
  • MRC 6301Bt – प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उपज

वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए:

  • LD 327 – देसी कपास की सूखा प्रतिरोधी किस्म, 11.5 क्विंटल/एकड़ उपज
  • FDK 124 – जल्दी परिपक्व होने वाली, सफेद मक्खी प्रतिरोधी

लोकप्रिय बीज ब्रांड और सीरीज़ (Popular Seed Brands)

1. रासी सीड्स (Rasi Seeds)

  • रासी 659 BG-II – किसानों में अत्यधिक लोकप्रिय, प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक उपज
  • रासी RCH 773 – उच्च उत्पादकता वाली किस्म
  • रासी RCH 776 BG-II – नवीनतम किस्म

विशेषता: रासी 659 दो बार की तुड़ाई में पूरा उत्पादन देती है, बीज की मात्रा अधिक होती है।

2. अजीत सीड्स (Ajeet Seeds)

  • अजीत 155 BG-II – वर्षा और सिंचित दोनों क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
    • अवधि: 145-160 दिन
    • गिनिंग आउटटर्न: 37-38%
    • रेशा लंबाई: 28.5-29.5 मिमी
    • वर्षा आधारित: 6-12 क्विंटल/एकड़
    • सिंचित: 12-18 क्विंटल/एकड़
  • अजीत 1199 BG-II – नई उन्नत किस्म
  • अजीत ACH 777-2 BG-II – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के लिए विशेष

3. क्रिस्टल सीड्स (Crystal Seeds)

  • सुपरकॉट BGII 115 – प्रति एकड़ 25 क्विंटल तक उत्पादन क्षमता
  • उच्च गुणवत्ता वाला रेशा

4. नुजिविदु सीड्स (Nuziveedu Seeds)

  • आशा-1 – निमाड़ अंचल में अत्यधिक लोकप्रिय
  • JKH सीरीज़ – विभिन्न क्षेत्रों के लिए

BG-1 बनाम BG-2: तकनीकी अंतर (BG-1 vs BG-2)

बॉलगार्ड-1 (BG-1 या Bollgard-I)

  • अनुमोदन वर्ष: 2002 में भारत में स्वीकृत
  • जीन: Cry1Ac नामक एकल बैक्टीरियल जीन
  • सुरक्षा: अमेरिकन बॉलवर्म और स्पॉटेड बॉलवर्म से सुरक्षा
  • पेटेंट स्थिति: 2006 में पेटेंट समाप्त हो गया
  • मुद्दा: 2009 तक गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) में प्रतिरोध विकसित हो गया

बॉलगार्ड-2 (BG-2 या Bollgard-II)

  • अनुमोदन वर्ष: 2006 में भारत में स्वीकृत
  • जीन: दो जीन – Cry1Ac और Cry2Ab2
  • सुरक्षा: तीन प्रकार के बॉलवर्म – अमेरिकन, स्पॉटेड और पिंक बॉलवर्म
  • वर्तमान स्थिति: भारत के 95% कपास क्षेत्र में BG-2 तकनीक का उपयोग
  • चुनौती: 2013 के बाद गुलाबी सुंडी में प्रतिरोध विकसित होना शुरू हुआ

BG-3 (भविष्य की तकनीक)

  • हर्बिसाइड टॉलरेंट (HT) BT कपास
  • अभी वाणिज्यिक अनुमोदन की प्रक्रिया में है
  • ग्लाइफोसेट जैसे खरपतवार नाशकों के प्रति सहिष्णु

BT कपास बनाम नॉन-BT कपास (BT vs Non-BT Comparison)

BT कपास के फायदे:

  1. कीट नियंत्रण: बॉलवर्म से 90% तक प्राकृतिक सुरक्षा
  2. कीटनाशक बचत: पहले 18-30 स्प्रे की जरूरत थी, अब बहुत कम
  3. उपज वृद्धि: प्रभावी कीट नियंत्रण से उपज में 20-30% वृद्धि
  4. स्वास्थ्य लाभ: कीटनाशक विषाक्तता के मामलों में 2.4-9 मिलियन की कमी

BT कपास की चुनौतियां:

  1. बीज की उच्च कीमत: ₹830 प्रति 450 ग्राम पैकेट
  2. द्वितीयक कीट: सफेद मक्खी, जैसिड, मीली बग की समस्या बढ़ी
  3. प्रतिरोध विकसित होना: 2013 के बाद गुलाबी सुंडी में प्रतिरोध
  4. बीज बचाना संभव नहीं: हर साल नया बीज खरीदना पड़ता है

नॉन-BT (देसी और नियमित) कपास:

  1. कम लागत: बीज की कीमत ₹50-100 प्रति किलोग्राम
  2. बीज संरक्षण: किसान अपने बीज बचा सकते हैं
  3. जैविक खेती: जैविक प्रमाणन के लिए उपयुक्त
  4. चुनौती: अधिक कीटनाशक की जरूरत और उपज कम हो सकती है

हाइब्रिड कपास बनाम देसी कपास (Hybrid vs Desi Cotton)

हाइब्रिड कपास (Hybrid Cotton)

विशेषताएं:

  • अमेरिकन कपास प्रजाति (Gossypium hirsutum)
  • वर्तमान में भारत के 95% क्षेत्र में हाइब्रिड कपास
  • उच्च उपज क्षमता: 12-18 क्विंटल प्रति एकड़ (सिंचित)
  • लंबा रेशा: 28-32 मिमी
  • रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर
  • अधिक पानी की जरूरत
  • कीटों और बीमारियों के प्रति संवेदनशील

लागत संरचना:

  • बीज: ₹830-1000 प्रति पैकेट
  • उर्वरक खर्च: ₹4000-5000 प्रति एकड़
  • कीटनाशक: ₹2000-3000 प्रति एकड़
  • कुल लागत: ₹25,000-30,000 प्रति एकड़

देसी कपास (Desi Cotton)

प्रजातियां:

  • गोसीपियम आर्बोरियम (Gossypium arboreum)
  • गोसीपियम हर्बेसियम (Gossypium herbaceum)

विशेषताएं:

  • 1947 में भारत के 97% क्षेत्र में देसी कपास थी
  • वर्तमान में मात्र 3-5% क्षेत्र में
  • सूखा सहिष्णु और कम पानी में भी उगाई जा सकती है
  • लवणीय और जलभराव मिट्टी में भी उगाई जा सकती है
  • कीटों और बीमारियों के प्रति स्वाभाविक प्रतिरोध
  • छोटा रेशा: 18-25 मिमी
  • उपज: 6-10 क्विंटल प्रति एकड़

लागत संरचना:

  • बीज: ₹50-100 प्रति किलोग्राम (500 रुपये प्रति एकड़)
  • कम उर्वरक और कीटनाशक की जरूरत
  • कुल लागत: ₹10,000-15,000 प्रति एकड़
  • शुद्ध लाभ: कम उपज के बावजूद देसी कपास से अधिक लाभ

प्रमुख देसी किस्में:

  1. HD 107 – हिसार विकसित, रोग प्रतिरोधी
  2. HD 432 – सूखा सहनशील
  3. CSH 8 – उच्च उपज देसी हाइब्रिड
  4. फुले धनवंतरी – महाराष्ट्र के लिए
  5. सूरज – राजस्थान के लिए उपयुक्त
  6. LD 694 – देसी कपास किस्म

बीज चयन और खरीद के टिप्स

बीज खरीदते समय ध्यान दें:

  1. प्रमाणित बीज: केवल प्रमाणित डीलरों से ही बीज खरीदें
  2. क्षेत्र-विशिष्ट: अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म चुनें
  3. मिट्टी और जलवायु: अपनी मिट्टी के पीएच और जलवायु के अनुसार चयन करें
  4. सिंचाई सुविधा: सिंचित और असिंचित के लिए अलग किस्में
  5. बीज दर:
    • अमेरिकन हाइब्रिड: 1.5 किलो प्रति एकड़
    • अमेरिकन वैरायटी: 3.5 किलो प्रति एकड़
    • देसी हाइब्रिड: 1.25 किलो प्रति एकड़
    • देसी वैरायटी: 3 किलो प्रति एकड़

लोकप्रिय ब्रांडों की कीमत रेंज:

  • रासी 659: ₹800-1000 प्रति पैकेट
  • अजीत 155: ₹750-900 प्रति पैकेट
  • नुजिविदु आशा: ₹850-1000 प्रति पैकेट
  • क्रिस्टल सुपरकॉट: ₹900-1100 प्रति पैकेट

2025 में कपास की खेती: नई तकनीकें

  1. हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS): उपज में 30-40% वृद्धि
  2. ड्रिप इरिगेशन: 40-50% पानी की बचत
  3. प्रिसिजन फार्मिंग: उपग्रह आधारित निगरानी
  4. AI-आधारित कीट प्रबंधन: समय पर पहचान और नियंत्रण

सरकारी योजनाएं और सहायता

  1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP):
    • मीडियम स्टेपल कपास
    • लॉन्ग स्टेपल कपास
    • 2023-24 में 9-10% की वृद्धि
  2. कपास उत्पादकता मिशन: ₹500 करोड़ का बजट (2025-26)
  3. कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI): MSP पर असीमित खरीद
  4. कस्तूरी कपास: भारतीय कपास की ब्रांडिंग पहल

निष्कर्ष

कपास की खेती में सफलता के लिए सही किस्म का चयन सबसे महत्वपूर्ण है। 2025 में BG-2 तकनीक वाली हाइब्रिड किस्में जैसे रासी 659, अजीत 155, और RCH 773 सिंचित क्षेत्रों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। वर्षा आधारित और कम संसाधन वाले क्षेत्रों में देसी कपास की किस्में अधिक लाभदायक साबित हो रही हैं।

सरकार की नई कपास उत्पादकता मिशन और ELS कपास पर फोकस से किसानों को भविष्य में बेहतर दाम मिलने की संभावना है। अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, और सिंचाई सुविधा के अनुसार किस्म का चयन करें। प्रमाणित बीज का उपयोग करें और आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन और हाई डेंसिटी प्लांटिंग को अपनाएं।

याद रखें – महंगा बीज हमेशा अच्छा नहीं होता। अपनी परिस्थितियों के अनुसार सही चयन करें और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ें।


नोट: बीज खरीदने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से अवश्य सलाह लें। बाजार में नकली और अवैध बीजों से सावधान रहें।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. 2025 में सबसे अच्छी कपास की किस्म कौन सी है?

उत्तर: यह आपके क्षेत्र, मिट्टी और सिंचाई सुविधा पर निर्भर करता है। सिंचित क्षेत्रों के लिए रासी 659 BG-II, अजीत 155 BG-II और RCH 773 सबसे लोकप्रिय हैं। वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए LD 327 देसी कपास या FDK 124 उपयुक्त हैं। ELS (Extra Long Staple) कपास की मांग बढ़ रही है जो उच्च दाम देती है।

2. BT कपास BG-1 और BG-2 में क्या अंतर है?

उत्तर: BG-1 में एक जीन (Cry1Ac) होता है जो अमेरिकन और स्पॉटेड बॉलवर्म से बचाता है। BG-2 में दो जीन (Cry1Ac और Cry2Ab2) होते हैं जो तीनों प्रकार के बॉलवर्म – पिंक, अमेरिकन और स्पॉटेड – से बेहतर सुरक्षा देते हैं। BG-2 अधिक प्रभावी है लेकिन महंगा भी है। वर्तमान में भारत में BG-2 तकनीक का 95% इस्तेमाल होता है।

3. हाइब्रिड कपास और देसी कपास में कौन ज्यादा लाभदायक है?

उत्तर: यह जटिल प्रश्न है। हाइब्रिड कपास की उपज अधिक है (12-18 क्विंटल/एकड़) लेकिन लागत भी ज्यादा है (₹25,000-30,000/एकड़)। देसी कपास की उपज कम है (6-10 क्विंटल/एकड़) पर लागत बहुत कम है (₹10,000-15,000/एकड़)। महाराष्ट्र के कुछ किसानों ने देसी कपास से हाइब्रिड से ज्यादा शुद्ध लाभ दर्ज किया है। असिंचित क्षेत्रों में देसी कपास बेहतर विकल्प है।

4. कपास के बीज कहाँ से खरीदें और कीमत क्या है?

कपास के बीज केवल प्रमाणित डीलरों और कृषि विभाग से खरीदें। प्रमुख ब्रांड:
रासी 659: ₹800-1000 प्रति पैकेट (450 ग्राम)
अजीत 155: ₹750-900 प्रति पैकेट
नुजिविदु आशा-1: ₹850-1000 प्रति पैकेट
देसी कपास बीज: ₹50-100 प्रति किलोग्राम
ऑनलाइन खरीद से बचें और कालाबाजारी से सावधान रहें। मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में रासी 659 और आशा-1 की सबसे ज्यादा मांग है।

5. क्षेत्रानुसार कपास की किस्म का चयन कैसे करें?

उत्तर:
उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान): HD 107, HD 432, अजीत ACH 777-2 BG-II
मध्य भारत (मध्य प्रदेश, गुजरात): रासी 659, आशा-1, RCH 773
दक्षिण भारत (महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश): RG 18, MRC 6301Bt, RCH 134Bt
असिंचित क्षेत्र: देसी कपास (HD 432, LD 327, CSH 8)
सिंचित क्षेत्र: BG-II हाइब्रिड (रासी 659, अजीत 155)
अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह अवश्य लें।

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