📌 इस लेख में क्या-क्या जानेंगे?

  • देसी टमाटर क्या है और यह हाइब्रिड से कैसे अलग है
  • उन्नत किस्में और उनकी उपज क्षमता
  • उपयुक्त जलवायु, मिट्टी और खेत की तैयारी
  • नर्सरी बनाने से लेकर रोपाई तक की विधि
  • खाद, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन
  • तुड़ाई, भंडारण और मुनाफे की पूरी जानकारी
🌡️
उचित तापमान
20°C – 27°C
🌱
pH मान
6.0 – 7.0
📦
बीज दर (प्रति एकड़)
200–250 ग्राम
🍅
उपज (प्रति एकड़)
100–150 क्विंटल
📅
फसल अवधि
75–120 दिन
💰
लागत (प्रति एकड़)
₹25,000–₹40,000

🍅 देसी टमाटर की खेती क्या है?

देसी टमाटर (Desi Tomato) वह किस्में होती हैं जो पारंपरिक रूप से भारतीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल विकसित की गई हैं। इनका स्वाद, रंग और पोषण मूल्य हाइब्रिड टमाटर की तुलना में कहीं बेहतर माना जाता है। बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग प्राकृतिक और देसी स्वाद की ओर लौट रहे हैं।

टमाटर (Solanum lycopersicum) भारत की सबसे महत्वपूर्ण सब्जी फसलों में से एक है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ टन से अधिक टमाटर का उत्पादन करता है और देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

💡 SmartKrishi की सलाह: देसी टमाटर की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी बेहद लाभकारी है क्योंकि इसमें हाइब्रिड बीज पर होने वाला अत्यधिक खर्च नहीं होता और बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।

🌤️ उचित जलवायु और तापमान

देसी टमाटर की खेती के लिए 20°C से 27°C तापमान सबसे उपयुक्त है। 16°C से कम और 27°C से अधिक तापमान पर फसल को नुकसान होता है। 21°C से 24°C तापमान पर लाइकोपीन (लाल रंगद्रव्य) का उत्पादन सबसे अधिक होता है।

पाले (frost) के प्रति टमाटर अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में इसे सावधानीपूर्वक उगाया जाता है। बुवाई के तीन मुख्य मौसम हैं:

मौसमनर्सरी बुवाईरोपाईक्षेत्र
खरीफ (वर्षाकालीन)जून–जुलाईजुलाई–अगस्तमैदानी क्षेत्र
रबी (शरद-ऋतु)अक्टूबर–नवंबरनवंबर–दिसंबरमैदानी क्षेत्र
जायद (ग्रीष्म)फरवरी–मार्चमार्च–अप्रैलमैदानी क्षेत्र
पहाड़ी क्षेत्रमार्च–अप्रैलअप्रैल–मईपहाड़ी क्षेत्र

🌿 देसी टमाटर की उन्नत किस्में

सही किस्म का चुनाव देसी टमाटर की खेती की सफलता की पहली शर्त है। IARI (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा) और अन्य सरकारी संस्थानों द्वारा विकसित निम्नलिखित किस्में लोकप्रिय और अधिक उत्पादन देने वाली हैं:

किस्म का नामपकने का समय (दिन)औसत उपज (टन/हेक्टेयर)विशेषता
पूसा रूबी75–8032–35खट्टा-मीठा स्वाद, दोनों मौसम में उपयुक्त
पूसा शीतल90–9528–32कम तापमान सहनशील, ठंड में उगाने के लिए
पूसा अर्ली ड्वार्फ75–8033–35बौनी किस्म, घर और बाजार दोनों के लिए
अर्का विकास85–9035–40जल्दी पकने वाली, रोग प्रतिरोधी
पंत बहार90–9530–35पछेती किस्म, बाजार के लिए उपयुक्त
पूसा गौरव80–8530–34प्रसंस्करण (Ketchup/Sauce) के लिए बेहतर
S-1285–9028–32देसी किस्म, तीखा स्वाद, स्थानीय बाजार में लोकप्रिय

अधिक किस्मों और बीज की जानकारी के लिए SmartKrishi.in पर विजिट करें। साथ ही Krishakjan – टमाटर की खेती गाइड और Krishak Jagriti – टमाटर उत्पादन भी देखें।

🪱 उपयुक्त मिट्टी और खेत की तैयारी

देसी टमाटर की खेती के लिए बलुई दोमट (Sandy Loam) या मृत्तिका दोमट (Clay Loam) मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.0 के बीच होना जरूरी है। अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय मिट्टी में टमाटर नहीं पनपता।

खेत की तैयारी के चरण

  1. गहरी जुताई: रोपाई से 3–4 सप्ताह पहले 25–30 सेमी गहरी जुताई करें ताकि पुराने खरपतवार और कीट नष्ट हों।
  2. गोबर खाद मिलाएँ: प्रति एकड़ 4–5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट मिट्टी में मिलाएँ।
  3. क्यारियाँ बनाएँ: 15–20 सेमी ऊँची उठी हुई क्यारियाँ (Raised Beds) बनाएँ जिससे जल-जमाव न हो।
  4. मिट्टी उपचार: नर्सरी में फ्यूसेरियम और अन्य मृदाजनित रोगों से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी (4 ग्राम/किग्रा बीज) से बीज उपचार करें।

🌱 नर्सरी तैयार करना और रोपाई

नर्सरी बनाने की विधि

देसी टमाटर की नर्सरी उठी हुई क्यारियों में तैयार की जाती है। प्रति एकड़ रोपाई के लिए 200–250 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। नर्सरी में बुवाई से 4–5 सप्ताह बाद पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है।

बीजों को बोने से पहले थाइरम 2.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज से उपचारित करना अनिवार्य है ताकि आर्द्र-पतन (Damping Off) रोग न लगे।

रोपाई की विधि और दूरी

प्रकारपंक्ति से पंक्तिपौधे से पौधे
निर्धारित किस्म (Determinate)60 सेमी45 सेमी
अनिर्धारित किस्म (Indeterminate)75–90 सेमी60 सेमी
⚠️ ध्यान दें: शाम के समय रोपाई करें और तुरंत हल्की सिंचाई करें। दोपहर की तेज धूप में रोपाई से पौध मर सकते हैं।

🌾 खाद और उर्वरक प्रबंधन

देसी टमाटर की अच्छी उपज के लिए संतुलित खाद प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर खाद देना सबसे उत्तम है।

खाद/उर्वरकमात्रा (प्रति एकड़)देने का समय
गोबर की खाद / कंपोस्ट4–5 टनखेत तैयारी के समय
नाइट्रोजन (N)50–60 किग्रारोपाई से पहले + 2 टॉप ड्रेसिंग
फॉस्फोरस (P₂O₅)30–40 किग्रारोपाई से पहले
पोटाश (K₂O)30–40 किग्रारोपाई से पहले
कैल्शियम नाइट्रेट10 किग्राफूल आने पर (BER रोकने के लिए)
🌿 जैविक विकल्प: रासायनिक उर्वरक की जगह वर्मीकंपोस्ट (2–3 टन/एकड़), जीवामृत और नीमखली का उपयोग करें। इससे मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है और उत्पाद प्रीमियम दाम पर बिकता है। अधिक जानकारी के लिए SmartKrishi.in पर जाएँ।

💧 सिंचाई प्रबंधन

टमाटर को नियमित और संतुलित सिंचाई की आवश्यकता होती है। न तो पानी की कमी होनी चाहिए और न ही जलभराव। रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें और उसके बाद मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई जारी रखें।

  • गर्मी में: 3–4 दिन के अंतराल पर
  • सर्दी में: 7–10 दिन के अंतराल पर
  • बारिश में: वर्षा पर निर्भर करता है, जल-निकास की व्यवस्था जरूरी

ड्रिप सिंचाई देसी टमाटर के लिए सबसे उपयुक्त है – इससे 40–50% पानी की बचत होती है और फल फटने (Fruit Cracking) की समस्या भी कम होती है। BharatAgri के अनुसार ड्रिप सिंचाई से उत्पादन 20–30% तक बढ़ सकता है।

⚠️ फल फटने से बचाव: लंबे समय तक सूखे के बाद एकाएक अधिक सिंचाई करने से फल फट जाते हैं। हमेशा नियमित और संतुलित सिंचाई करें।

🐛 प्रमुख रोग और कीट नियंत्रण

प्रमुख रोग

🔴 आर्द्र-पतन (Damping Off)

लक्षण: नर्सरी में पौध जमीन की सतह से सड़कर गिर जाते हैं। नियंत्रण: थाइरम 2.5 ग्राम/किग्रा बीज उपचार + ट्राइकोडर्मा से मिट्टी उपचार।

🔴 अगेती झुलसा (Early Blight)

लक्षण: पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे जो बाद में बड़े होते जाते हैं। नियंत्रण: मैंकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर पानी का छिड़काव।

🔴 पछेती झुलसा (Late Blight)

लक्षण: पत्तियाँ और तने काले पड़ जाते हैं, फल सड़ने लगते हैं। नियंत्रण: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम/लीटर का छिड़काव।

🔴 विषाणु रोग – कुंचन रोग (Leaf Curl Virus)

लक्षण: पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं, पौधे बौने रह जाते हैं। नियंत्रण: सफेदमक्खी नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/लीटर का छिड़काव। रोग प्रतिरोधी किस्में चुनें।

प्रमुख कीट

🐛 फल छेदक (Fruit Borer – Helicoverpa armigera)

नियंत्रण: फेरोमोन ट्रैप (5 प्रति एकड़) + क्लोरपायरीफॉस 2 मिली/लीटर या साइपरमेथ्रिन का छिड़काव। कृषक जगत के अनुसार यह टमाटर का सबसे खतरनाक कीट है।

🐛 सफेदमक्खी (Whitefly)

नियंत्रण: पीले चिपचिपे ट्रैप + इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव। पौधों की नर्सरी को नेट से ढकें।

🚜 तुड़ाई, उपज और भंडारण

तुड़ाई का सही समय

देसी टमाटर रोपाई के 75 से 120 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार होते हैं। फलों को पूर्ण परिपक्व (Mature Green) अवस्था में तोड़ें यदि दूर बाजार भेजना हो, और लाल होने पर तोड़ें यदि स्थानीय बाजार के लिए हो। फलों की तुड़ाई 5–7 दिन के अंतराल पर करते रहें।

उपज

अच्छी देखभाल के साथ प्रति एकड़ देसी टमाटर की खेती में 100 से 150 क्विंटल उपज मिल सकती है। उन्नत किस्मों में यह 200 क्विंटल तक भी जा सकती है।

भंडारण

कच्चे टमाटर को 12–15°C तापमान पर 2–3 सप्ताह तक संग्रहित किया जा सकता है। पके फलों को 7–10°C पर 1 सप्ताह तक रखा जा सकता है। कोल्ड स्टोरेज में रखने से मूल्य अच्छा मिलता है।

💰 आय का अनुमान: यदि बाजार में ₹15–₹30 प्रति किग्रा भाव मिले तो प्रति एकड़ ₹1.5 लाख से ₹4.5 लाख तक की आमदनी संभव है। अधिक मुनाफे के लिए FPO (Farmer Producer Organization) के माध्यम से सामूहिक विपणन करें। अधिक जानकारी के लिए SmartKrishi.in पर जाएँ।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: देसी टमाटर की खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा है?
देसी टमाटर की खेती मुख्य रूप से तीन मौसम में होती है – खरीफ (जून-जुलाई), रबी (अक्टूबर-नवंबर) और जायद (फरवरी-मार्च)। मैदानी क्षेत्रों में रबी का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस समय तापमान 20–25°C के बीच रहता है जो टमाटर की वृद्धि और फल विकास के लिए आदर्श है।
प्र. 2: देसी टमाटर की प्रमुख उन्नत किस्में कौन सी हैं?
IARI द्वारा विकसित पूसा रूबी, पूसा शीतल, पूसा अर्ली ड्वार्फ और अन्य संस्थानों द्वारा अर्का विकास, पंत बहार, पूसा गौरव और S-12 देसी टमाटर की प्रमुख उन्नत किस्में हैं। पूसा रूबी का औसत उत्पादन 32–35 टन प्रति हेक्टेयर है और यह दोनों मौसम (शरद एवं ग्रीष्म) में उगाई जा सकती है।
प्र. 3: एक एकड़ देसी टमाटर की खेती में कितनी लागत और कितना मुनाफा होता है?
एक एकड़ देसी टमाटर की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर लगभग ₹25,000 से ₹40,000 की लागत आती है। अच्छी देखभाल से 100–150 क्विंटल उपज मिलती है। ₹15–₹30/किग्रा बाजार भाव पर ₹1.5 लाख से ₹4.5 लाख तक की कमाई संभव है। लागत घटाने के लिए जैविक खाद और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाएँ।
प्र. 4: देसी टमाटर के लिए कौन सी मिट्टी और pH सबसे उपयुक्त है?
देसी टमाटर की खेती के लिए बलुई दोमट या मृत्तिका दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है जिसमें जल-निकास की उचित व्यवस्था हो। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता कम हो जाती है जिससे उपज प्रभावित होती है।
प्र. 5: टमाटर में फल छेदक कीट (Fruit Borer) से बचाव कैसे करें?
फल छेदक (Helicoverpa armigera) टमाटर का सबसे खतरनाक कीट है। इससे बचाव के लिए – (1) खेत में 5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाएँ, (2) क्लोरपायरीफॉस 2 मिली/लीटर या साइपरमेथ्रिन का छिड़काव करें, (3) Bacillus thuringiensis (Bt) जैविक कीटनाशक का उपयोग करें। रोपाई के 30 दिन बाद से नियमित निगरानी करते रहें।

📝 निष्कर्ष

देसी टमाटर की खेती (Desi Tamatar Ki Kheti) आज के समय में किसानों के लिए एक बेहद लाभदायक विकल्प है। सही किस्म का चुनाव, समय पर बुवाई, संतुलित खाद-पानी और कीट-रोग नियंत्रण से आप प्रति एकड़ बेहतरीन उपज और मुनाफा हासिल कर सकते हैं। जैविक तरीके से देसी टमाटर उगाकर आप प्रीमियम बाजार तक भी पहुँच सकते हैं।

अधिक कृषि जानकारी, सरकारी योजनाओं और स्मार्ट खेती के टिप्स के लिए SmartKrishi.in पर विजिट करते रहें। आप Krishak Jagriti और BharatAgri पर भी अधिक जानकारी पढ़ सकते हैं।

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