अंगूर की खेती की जानकारी | Grape Farming
अंगूर (Grape) एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फल फसल है। अंगूर की खेती (Grape Farming) भारत में तेजी से बढ़ रही है। अंगूर का उपयोग ताजे फल, किशमिश, वाइन और जूस बनाने में होता है। अंगूर पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। भारत में महाराष्ट्र अंगूर उत्पादन में प्रथम है।
जलवायु की जरूरत
अंगूर समशीतोष्ण और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु (Temperate and Subtropical Climate) का पौधा है। अंगूर को लंबी गर्म और शुष्क गर्मी तथा ठंडी सर्दी की जरूरत होती है। 15 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान अंगूर की वृद्धि के लिए उपयुक्त है। फल पकने के समय शुष्क मौसम जरूरी है। अधिक वर्षा और आर्द्रता से रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
मिट्टी का चयन
अंगूर की खेती के लिए गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी (Well-Drained Sandy Loam Soil) सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 8 के बीच होना चाहिए। अंगूर हल्की क्षारीय मिट्टी में भी उग सकता है। भारी मिट्टी और जलभराव वाली जमीन उपयुक्त नहीं है। खेत को गहरी जुताई करके समतल बनाना जरूरी है।
अंगूर की किस्में
भारत में अंगूर की कई व्यावसायिक किस्में (Commercial Varieties) उगाई जाती हैं। थॉम्पसन सीडलेस, अनाब-ए-शाही, पूसा सीडलेस, परलेट, ब्यूटी सीडलेस, शरद सीडलेस, सोनाका और मनिका प्रमुख किस्में हैं। थॉम्पसन सीडलेस (Thompson Seedless) सबसे लोकप्रिय बीज रहित किस्म है जो किशमिश बनाने के लिए भी उपयुक्त है। बंगलौर ब्लू और गुलाबी किस्में भी अच्छी हैं।
पौधे लगाने की विधि
अंगूर की रोपाई जनवरी-फरवरी या जून-जुलाई में करें। कटिंग या ग्राफ्टेड पौधे (Grafted Plants) लगाएं। पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर रखें। 60 सेमी × 60 सेमी × 60 सेमी के गड्ढे खोदें। गड्ढों को गोबर की खाद, कम्पोस्ट और मिट्टी के मिश्रण से भर दें। रोपण के बाद तुरंत सिंचाई करें।
ट्रेलिस सिस्टम
अंगूर की बेल को सहारा देने के लिए ट्रेलिस सिस्टम (Trellis System) बनाना जरूरी है। बोवर सिस्टम, नॉर्टन सिस्टम और टेलीफोन सिस्टम प्रमुख हैं। बोवर सिस्टम भारत में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। इसमें 6 फीट ऊंचे खंभे लगाकर ऊपर तार की जाली बनाई जाती है। सही ट्रेलिस से उपज और गुणवत्ता बढ़ती है।
सिंचाई और जल प्रबंधन
अंगूर को नियमित सिंचाई (Irrigation) की जरूरत होती है। गर्मियों में हर 7-10 दिन और सर्दियों में 15-20 दिन के अंतर पर पानी दें। फूल आने के समय पानी कम दें। फल विकास के समय नियमित सिंचाई जरूरी है। ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) अंगूर के लिए सबसे उत्तम है। पकने के 2-3 सप्ताह पहले सिंचाई बंद कर दें।
खाद और उर्वरक
अंगूर को संतुलित पोषण (Balanced Nutrition) की जरूरत होती है। प्रति पौधा 20-25 किलो गोबर की खाद, 400 ग्राम नाइट्रोजन, 400 ग्राम फास्फोरस और 400 ग्राम पोटाश दें। खाद को तीन भागों में बांटकर दें – जनवरी, मार्च और मई में। पोटाश (Potassium) से अंगूर की मिठास और रंग बढ़ता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव फायदेमंद है।
छंटाई और प्रबंधन
अंगूर में छंटाई (Pruning) सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। साल में दो बार छंटाई करें – फाउंडेशन प्रूनिंग (अक्टूबर) और फ्रूट प्रूनिंग (मई-जून)। पुरानी, सूखी और कमजोर शाखाओं को काट दें। सही छंटाई से उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ती है। नई शाखाओं को ट्रेलिस पर सही तरीके से फैलाएं। ट्रेनिंग (Training) से बेल का आकार नियंत्रित रहता है।
रोग और कीट नियंत्रण
अंगूर में पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew), डाउनी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज प्रमुख रोग हैं। फ्ली बीटल, थ्रिप्स, मीली बग और फल मक्खी प्रमुख कीट हैं। रोगों की रोकथाम के लिए सल्फर का छिड़काव करें। बोर्डो मिश्रण का उपयोग करें। फीरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) लगाएं। नीम का तेल और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। समय पर छिड़काव जरूरी है।
फल तोड़ना और उपज
अंगूर रोपण के 2-3 साल में फल देना शुरू कर देता है। फल पूरी तरह पकने पर तोड़ें। अंगूर तोड़ने के बाद नहीं पकते इसलिए सही समय पर तोड़ना जरूरी है। गुच्छों को सावधानी से कैंची से काटें। एक पूर्ण विकसित बेल से 15 से 20 किलो उपज (Yield) मिल सकती है। प्रति हेक्टेयर 20 से 30 टन उत्पादन होता है।
आर्थिक लाभ
एक हेक्टेयर में अंगूर की खेती स्थापित करने में 3 से 5 लाख रुपये की लागत आती है। बेलें 2-3 साल से व्यावसायिक उत्पादन देने लगती हैं। अच्छे प्रबंधन से सालाना 8 से 15 लाख रुपये की आय (Income) हो सकती है। निर्यात गुणवत्ता के अंगूर और बढ़िया मुनाफा देते हैं। किशमिश और वाइन उद्योग से अतिरिक्त आय संभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अंगूर की बेल कितने साल में फल देती है?
अंगूर की बेल रोपण के 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर देती है। पूर्ण उत्पादन 4-5 साल में मिलता है।
2. अंगूर की खेती के लिए ट्रेलिस क्यों जरूरी है?
अंगूर बेल वाला पौधा है इसलिए इसे सहारे की जरूरत होती है। ट्रेलिस से बेल को सही आकार मिलता है और उपज बढ़ती है।
3. अंगूर में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
पाउडरी मिल्ड्यू और डाउनी मिल्ड्यू रोग अंगूर की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। समय पर छिड़काव और देखभाल से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
4. अंगूर की कौन सी किस्म सबसे अच्छी है?
थॉम्पसन सीडलेस सबसे लोकप्रिय और अच्छी किस्म है। यह बीज रहित है और निर्यात के लिए भी उपयुक्त है।
5. अंगूर की खेती में कितना मुनाफा होता है?
अच्छी देखभाल से एक हेक्टेयर से सालाना 8 से 15 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है। निर्यात गुणवत्ता के अंगूर अधिक आय देते हैं।