अमरूद की खेती की जानकारी | Guava Farming

अमरूद की खेती की जानकारी | Guava Farming

अमरूद (Guava) भारत की प्रमुख व्यावसायिक फल फसलों में से एक है। अमरूद को गरीबों का सेब (Apple of Poor) भी कहा जाता है। अमरूद की खेती (Guava Cultivation) लाभदायक है क्योंकि यह कम देखभाल में भी अच्छी उपज देता है। अमरूद विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है और इसका उपयोग ताजे फल और प्रसंस्कृत उत्पादों दोनों में होता है।

जलवायु और तापमान

अमरूद उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु (Tropical and Subtropical Climate) का पौधा है। यह विभिन्न जलवायु में आसानी से उग सकता है। 23 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान अमरूद की वृद्धि के लिए उत्तम है। अमरूद ठंड और पाले को सहन नहीं कर पाता। शुष्क मौसम में फूल और फल अच्छे आते हैं। अधिक वर्षा से फलों में दरार आ सकती है।

मिट्टी की जरूरत

अमरूद की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। गहरी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी (Sandy Loam Soil) सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का pH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। अच्छी जल निकासी जरूरी है। अमरूद हल्की क्षारीय और अम्लीय मिट्टी में भी उग सकता है। भारी मिट्टी में जड़ सड़न की समस्या हो सकती है।

अमरूद की किस्में

भारत में अमरूद की कई उन्नत किस्में (Improved Varieties) उगाई जाती हैं। इलाहाबाद सफेदा, इलाहाबाद सुरखा, लखनऊ-49, पंजाब किश्मिश, ताइवान पिंक, हिसार सफेदा और अर्का मृदुला प्रमुख किस्में हैं। इलाहाबाद सफेदा सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक किस्म है। ताइवान पिंक में गुलाबी गूदा होता है और यह बाजार में महंगा बिकता है।

पौध रोपण की विधि

अमरूद के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय फरवरी-मार्च और जून-जुलाई है। पौधे से पौधे की दूरी 5 से 6 मीटर रखें। गड्ढे का आकार 60 सेमी × 60 सेमी × 60 सेमी रखें। गड्ढों को गोबर की खाद, मिट्टी और कम्पोस्ट के मिश्रण से भर दें। कलमी पौधे (Grafted Plants) लगाना बेहतर है क्योंकि ये 2-3 साल में फल देने लगते हैं।

सिंचाई की आवश्यकता

गर्मियों में अमरूद के पौधों को हर 7-10 दिन में पानी दें। सर्दियों में 15-20 दिन के अंतर पर सिंचाई (Irrigation) करें। फूल आने और फल बनने के समय नियमित सिंचाई जरूरी है। बारिश के मौसम में सिंचाई की जरूरत नहीं होती। ड्रिप सिंचाई विधि से पानी की बचत होती है। जल जमाव से बचना चाहिए।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

नए पौधों को पहले साल 10 किलो गोबर की खाद दें। हर साल पौधे की उम्र के अनुसार खाद की मात्रा बढ़ाएं। पूर्ण विकसित पेड़ को 30-40 किलो गोबर की खाद, 600 ग्राम नाइट्रोजन, 250 ग्राम फास्फोरस और 400 ग्राम पोटाश दें। खाद को दो भागों में बांटकर फरवरी और जून में डालें। जैविक खाद (Organic Fertilizer) मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाती है।

कांट-छांट और देखभाल

अमरूद के पेड़ों की नियमित कांट-छांट (Pruning) करना जरूरी है। सूखी, रोगग्रस्त और कमजोर शाखाओं को काट दें। मई-जून में कांट-छांट करने से जून-जुलाई में नई शाखाएं आती हैं। नियमित कांट-छांट से साल में दो बार फसल (Biannual Cropping) ली जा सकती है। पौधों के पास खरपतवार न उगने दें।

रोग और कीट नियंत्रण

अमरूद में फल मक्खी (Fruit Fly), छाल खाने वाला कीट, तना छेदक प्रमुख कीट हैं। विल्ट, एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू रोग आम हैं। फीरोमोन ट्रैप (Pheromone Trap) लगाकर फल मक्खी को नियंत्रित करें। नीम का तेल और जैविक कीटनाशक का उपयोग करें। रोगग्रस्त भागों को काटकर जला दें। समय पर छिड़काव करें।

फल तुड़ाई और उपज

अमरूद के फल पकने से पहले तोड़े जाते हैं जब उनका रंग हल्का पीला हो जाए। साल में दो बार फसल मिलती है – बरसात की फसल (जुलाई-अगस्त) और जाड़े की फसल (दिसंबर-जनवरी)। जाड़े की फसल बेहतर गुणवत्ता की होती है। एक पूर्ण विकसित पेड़ से 100 से 150 किलो उपज (Yield) मिल सकती है। प्रति हेक्टेयर 15 से 25 टन उत्पादन होता है।

आर्थिक लाभ

एक हेक्टेयर में अमरूद की बागवानी में 1 से 1.5 लाख रुपये का खर्च आता है। पेड़ 3-4 साल से फल देना शुरू कर देते हैं। अच्छी किस्मों और देखभाल से सालाना 3 से 5 लाख रुपये की आय (Income) हो सकती है। अमरूद की जेली, जूस और अन्य उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अमरूद का पेड़ कितने साल में फल देता है?
कलमी अमरूद का पेड़ 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर देता है। बीज से उगाए गए पेड़ को 5-6 साल लग सकते हैं।

2. अमरूद की खेती किस मौसम में होती है?
अमरूद साल भर उगाया जा सकता है। पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय फरवरी-मार्च और जून-जुलाई है। साल में दो बार फल मिलते हैं।

3. अमरूद में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
फल मक्खी और विल्ट रोग अमरूद की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। फीरोमोन ट्रैप और समय पर छिड़काव से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

4. अमरूद की कौन सी किस्म सबसे अच्छी है?
इलाहाबाद सफेदा सबसे लोकप्रिय और अच्छी किस्म है। ताइवान पिंक भी बाजार में अच्छी कीमत देता है।

5. अमरूद की खेती में कितना मुनाफा होता है?
अच्छी देखभाल से एक हेक्टेयर से सालाना 3 से 5 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है। यह किस्म और बाजार मूल्य पर निर्भर करता है।

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