कपास की खेती कैसे होती है (Kapas Ki Kheti) – बुवाई से चुनाई तक सम्पूर्ण जानकारी

कपास की खेती कैसे होती है – सम्पूर्ण जानकारी 2025 | SmartKrishi
खरीफ फसल गाइड 2025

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कपास की खेती कैसे होती है
Kapas Ki Kheti – बुवाई से चुनाई तक सम्पूर्ण जानकारी

कपास को “सफेद सोना” कहा जाता है। जानें उन्नत किस्में, सही बुवाई समय, मिट्टी, खाद, सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और MSP 2024-25 की पूरी जानकारी – सरल हिंदी में।

वानस्पतिक नाम
Gossypium hirsutum
फसल मौसम
खरीफ (अप्रैल–नवंबर)
उपयुक्त तापमान
21°C – 30°C
pH मान
6.0 – 8.0
MSP 2024-25 (मध्यम रेशा)
₹7,121 / क्विंटल
औसत उपज (प्रति हेक्टेयर)
447 किग्रा (लिंट)

कपास का परिचय और भारत में महत्व

कपास (Cotton) भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। इसे “सफेद सोना” भी कहते हैं। कपास का उपयोग कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में होता है और इसके बीजों में 15 से 25 प्रतिशत तेल होता है जो खाद्य तेल का प्रमुख स्रोत है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। देश में लगभग 120 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती होती है और प्रतिवर्ष लगभग 250 लाख गांठ (480 पाउंड प्रत्येक) का उत्पादन होता है। भारत का कपड़ा और वस्त्र उद्योग इसी कपास पर आधारित है जो लाखों लोगों को रोजगार देता है।

भारत में प्रमुख कपास उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा। इनमें से गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश मिलकर “मध्य क्षेत्र” बनाते हैं जो भारत का सबसे बड़ा कपास उत्पादन क्षेत्र है।

उपयुक्त जलवायु और उत्पादक राज्य

कपास उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में पनपती है। अंकुरण के समय न्यूनतम तापमान 15°C और वानस्पतिक वृद्धि के लिए आदर्श तापमान 21°C से 27°C होना चाहिए। कपास 43°C तक का तापमान सहन कर सकती है लेकिन 21°C से नीचे तापमान फसल के लिए नुकसानदायक होता है।

कपास की फसल को कम से कम 210 पाला-मुक्त दिन और 50 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। फल बनने और पकने के समय गर्म दिन और ठंडी रातें (अधिक दैनिक तापांतर) फाइबर की गुणवत्ता के लिए बेहद लाभकारी होती हैं।

जलवायु पैरामीटरआवश्यकता
अंकुरण तापमान (न्यूनतम)15°C
वृद्धि के लिए आदर्श तापमान21°C – 27°C
अधिकतम सहन तापमान43°C
वार्षिक वर्षा50–100 सेमी
पाला-मुक्त दिन (न्यूनतम)210 दिन
फसल अवधि150–180 दिन
महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में लगभग 67% कपास वर्षा-सिंचित (rainfed) क्षेत्रों में उगाई जाती है, मुख्यतः मध्य और दक्षिण भारत में। केवल 33% क्षेत्र में सिंचित खेती होती है जो मुख्यतः उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा) में है।

मिट्टी का चुनाव और खेत की तैयारी

कपास विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाई जाती है – उत्तर भारत में गहरी जलोढ़ दोमट, मध्य भारत में काली चिकनी मिट्टी (रेगुर) और दक्षिण भारत में काली तथा मिश्रित लाल-काली मिट्टी। कपास जलभराव के प्रति संवेदनशील है इसलिए अच्छी जल-निकासी वाली गहरी मिट्टी जरूरी है।

मिट्टी का pH मान 6.0 से 8.0 के बीच होना चाहिए। कपास लवणता के प्रति आंशिक रूप से सहनशील है लेकिन जलभराव बिल्कुल सहन नहीं करती।

खेत तैयार करने के चरण

  1. गहरी जुताई: बुवाई से 3–4 सप्ताह पहले मिट्टी पलटने वाले हल (Mould Board Plough) से 30–40 सेमी गहरी जुताई करें ताकि पुराने कीट और रोगाणु नष्ट हों।
  2. समतलीकरण: 2–3 बार क्रॉस-जुताई करें और पाटा चलाकर खेत को समतल करें।
  3. गोबर खाद मिलाएँ: बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10–15 टन सड़ी गोबर की खाद या कंपोस्ट भूमि में मिलाएँ।
  4. मिट्टी परीक्षण: बुवाई से पहले KVK या कृषि विभाग से मिट्टी परीक्षण कराएँ और रिपोर्ट के अनुसार खाद का उपयोग करें।
  5. जल-निकास की व्यवस्था: खेत में उचित ढलान सुनिश्चित करें और जल-निकास नालियाँ बनाएँ।

कपास की उन्नत किस्में

भारत में कपास की दो मुख्य प्रजातियाँ उगाई जाती हैं – देसी कपास (G. arboreum, G. herbaceum) और अमेरिकन कपास (G. hirsutum)। वर्तमान में भारत में 90% से अधिक खेती G. hirsutum की Bt हाइब्रिड किस्मों से होती है।

Bt हाइब्रिड किस्में (व्यावसायिक खेती के लिए)

किस्मअवधि (दिन)उपज (क्विंटल/हेक्टेयर)उपयुक्त क्षेत्र
RCH 773 BG-II160–17025–35मध्य व दक्षिण भारत
RCH 776 BG-II155–16528–38महाराष्ट्र, गुजरात
NCS 145 BG-II155–16525–32तेलंगाना, आंध्र प्रदेश
Ankur 3028 BG-II150–16022–30मध्य भारत
Bunny BG-II155–17025–35दक्षिण भारत

देसी कपास की उन्नत किस्में

किस्मअवधि (दिन)उपज (क्विंटल/हेक्टेयर)विशेषता
H 777165–17516–22कम वर्षा में उपयुक्त
H 1098170–18018–24उत्तर भारत के लिए
LD 694155–16515–20पंजाब, हरियाणा
G. Cot 10160–17018–25गुजरात के लिए
किस्म चुनते समय ध्यान दें: हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और प्रचलित रोगों के अनुसार किस्म चुनें। राज्य कृषि विभाग या KVK की सिफारिश को प्राथमिकता दें। SmartKrishi.in पर क्षेत्र-अनुसार किस्म की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

बीज उपचार, बुवाई का समय और विधि

बीज की मात्रा

Bt हाइब्रिड बीज के लिए प्रति एकड़ 1 पैकेट (450 ग्राम) पर्याप्त होता है। देसी किस्मों के लिए बिना रेशे के बीज (delinted seed) 2–3 किग्रा प्रति एकड़ और रेशेदार बीज 8–10 किग्रा प्रति एकड़ उपयोग करें।

बीज उपचार

बुवाई से पहले बीजों को निम्नलिखित से उपचारित करें:

  • फफूंदनाशक: थाइरम 3 ग्राम + कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किग्रा बीज
  • जैविक उपचार: ट्राइकोडर्मा विरिडी 4 ग्राम प्रति किग्रा बीज
  • कीटनाशक: इमिडाक्लोप्रिड 70 WS – 7 ग्राम प्रति किग्रा बीज (सफेदमक्खी से प्रारंभिक सुरक्षा)

बुवाई का सही समय

क्षेत्र / राज्यबुवाई का समय
पंजाब, हरियाणा (उत्तर क्षेत्र)अप्रैल 15 – मई 15
राजस्थानअप्रैल 15 – मई 30
गुजरात, मध्य प्रदेशजून 15 – जुलाई 15
महाराष्ट्र, तेलंगानाजून 1 – जुलाई 15
कर्नाटक, आंध्र प्रदेशजून – जुलाई

बुवाई की दूरी

किस्म प्रकारपंक्ति × पौधे की दूरी
Bt हाइब्रिड (सिंचित)90 × 60 सेमी
Bt हाइब्रिड (वर्षाधारित)90 × 90 सेमी
देसी किस्म60 × 45 सेमी
HDPS (उच्च घनत्व रोपण)45 × 10 सेमी
HDPS तकनीक: High Density Planting System (उच्च घनत्व रोपण) में अधिक पौधे प्रति एकड़ लगाए जाते हैं जिससे उत्पादन 20–30% तक बढ़ सकता है। NFSM (National Food Security Mission) इस तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। अधिक जानकारी के लिए SmartKrishi.in पर जाएँ।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

कपास एक भारी पोषण-उपभोक्ता फसल है। संतुलित खाद प्रबंधन से न केवल उपज बढ़ती है बल्कि फाइबर की गुणवत्ता भी सुधरती है। मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद देना सबसे उत्तम है।

खाद / उर्वरकमात्रा (प्रति एकड़)देने का समय
गोबर की खाद / कंपोस्ट4–5 टनबुवाई से पहले (जुताई में)
नाइट्रोजन (N)40–60 किग्रातीन बार – बुवाई, 45 दिन, 90 दिन
फॉस्फोरस (P₂O₅)20–30 किग्राबुवाई के समय (बेसल डोज)
पोटाश (K₂O)20–30 किग्राबुवाई के समय (बेसल डोज)
बोरॉन (Borax)1–2 किग्राफूल आने से पहले
जिंक सल्फेट10–12 किग्राबुवाई के समय (यदि कमी हो)
नाइट्रोजन विभाजन का नियम: कुल नाइट्रोजन को तीन भागों में बाँटें – पहली खुराक बुवाई के समय, दूसरी 45 दिन बाद (वर्गाकार फूल अवस्था में) और तीसरी 90 दिन बाद (फल बनने की अवस्था में)। एक बार में अधिक नाइट्रोजन देने से पत्ते अधिक बढ़ते हैं और फल कम लगते हैं।

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण

सिंचाई प्रबंधन

वर्षाधारित क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है, लेकिन लंबे सूखे के दौरान एक-दो सिंचाइयाँ अवश्य दें। सिंचित क्षेत्रों में नियमित और संतुलित सिंचाई आवश्यक है।

  • बुवाई के तुरंत बाद: पहली सिंचाई (यदि वर्षा न हो)
  • वर्गाकार अवस्था (45–60 दिन): महत्वपूर्ण सिंचाई – इस समय सूखा पड़ने पर उपज पर सर्वाधिक असर
  • फूल और बोल बनने का समय: हर 10–15 दिन पर सिंचाई
  • बोल पकने का समय: सिंचाई कम करें ताकि फाइबर की गुणवत्ता अच्छी रहे

ड्रिप सिंचाई और फर्रो सिंचाई दोनों कपास के लिए उपयुक्त हैं। ड्रिप से 30–40% पानी की बचत होती है और उपज भी बेहतर मिलती है। Krishak Jagriti के अनुसार सही समय पर सिंचाई से उपज में 25% तक सुधार संभव है।

खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के बाद पहले 45 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान खरपतवार पोषक तत्वों और नमी को अवशोषित कर लेते हैं।

  • पहली निराई-गुड़ाई: पहली सिंचाई के 8–10 दिन बाद (बुवाई के 20–25 दिन बाद)
  • दूसरी निराई-गुड़ाई: 40–45 दिन बाद
  • रासायनिक नियंत्रण: Pendimethalin 1.5 किग्रा/हेक्टेयर – बुवाई के 3 दिन के अंदर प्री-इमर्जेंस छिड़काव

रोग और कीट प्रबंधन

कपास कीट और रोगों के प्रति अत्यंत संवेदनशील फसल है। भारत में कपास की उत्पादकता स्थिर रहने का एक प्रमुख कारण पिंक बोलवर्म और सफेदमक्खी जैसे कीटों का लगातार प्रकोप है।

प्रमुख रोग

जड़ सड़न / उकठा (Fusarium Wilt)

लक्षण: पौधे अचानक पीले पड़कर मुरझा जाते हैं, जड़ें भीतर से भूरी हो जाती हैं। नियंत्रण: रोग-प्रतिरोधी किस्म चुनें, ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार करें और कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम/लीटर से ड्रेंचिंग करें।

पत्ती धब्बा रोग (Alternaria / Cercospora Leaf Spot)

लक्षण: पत्तियों पर गोल-गोल भूरे-काले धब्बे, जो बाद में पत्तियाँ झड़ा देते हैं। नियंत्रण: मैंकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम/लीटर का छिड़काव।

बोल रॉट (Boll Rot)

लक्षण: कपास के डोडे (bolls) गलने और सड़ने लगते हैं। नियंत्रण: उचित जल-निकास, अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें और मैंकोजेब का छिड़काव करें।

प्रमुख कीट

पिंक बोलवर्म (Pink Bollworm – Pectinophora gossypiella)

यह कपास का सबसे विनाशकारी कीट है जो Bt कपास में भी प्रतिरोधकता विकसित कर चुका है। नियंत्रण: फेरोमोन ट्रैप (5 प्रति एकड़), क्लोरपायरीफॉस 2 मिली/लीटर या इमामेक्टिन बेंजोएट 0.5 ग्राम/लीटर का छिड़काव।

सफेदमक्खी (Whitefly – Bemisia tabaci)

यह कीट पत्तियों का रस चूसता है और पत्ती मरोड़ (Leaf Curl) विषाणु रोग फैलाता है। नियंत्रण: पीले चिपचिपे ट्रैप, बुवाई से पहले बीज को इमिडाक्लोप्रिड से उपचारित करें, डाइफेंथाईउरॉन 1.5 ग्राम/लीटर का छिड़काव।

तेला / थ्रिप्स (Thrips – Thrips tabaci)

नियंत्रण: नीम तेल 5 मिली/लीटर या स्पिनोसैड 0.3 मिली/लीटर का छिड़काव। प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण जरूरी है।

अमेरिकन बोलवर्म (Helicoverpa armigera)

नियंत्रण: फेरोमोन ट्रैप (5/एकड़), Bt स्प्रे (Bacillus thuringiensis), क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 0.3 मिली/लीटर का छिड़काव।

IPM (Integrated Pest Management) अपनाएँ: रासायनिक कीटनाशकों पर पूरी तरह निर्भरता से कीटों में प्रतिरोधकता बढ़ती है। जैविक नियंत्रण (फेरोमोन ट्रैप, Bt स्प्रे), सांस्कृतिक नियंत्रण (फसल चक्र) और रासायनिक नियंत्रण का संयोजन सबसे प्रभावी है।

चुनाई, उपज और MSP

चुनाई का सही समय और विधि

कपास के डोडे (bolls) पकने और खुलने के बाद चुनाई की जाती है। समय पर चुनाई न करने पर कपास जमीन पर गिर जाती है और गुणवत्ता कम हो जाती है।

  • अमेरिकन/Bt कपास: हर 15–20 दिन के अंतराल पर चुनाई करें।
  • देसी कपास: हर 8–10 दिन के अंतराल पर चुनाई करें।
  • ओस वाले समय (सुबह) में चुनाई न करें – नमी से गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  • खराब डोडे (रोगग्रस्त) को अलग रखें और बीज के रूप में न उपयोग करें।

उपज

भारत में कपास की औसत उपज 447 किग्रा लिंट प्रति हेक्टेयर (2024-25 अनुमान) है जो वैश्विक औसत से कम है। अच्छी देखभाल और उन्नत Bt किस्मों से प्रति एकड़ 8 से 12 क्विंटल कच्ची कपास (कपास) मिल सकती है। BharatAgri के अनुसार स्मार्ट तकनीक अपनाने पर 20 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन संभव है।

MSP और बाजार भाव

कपास का प्रकारMSP 2024-25MSP 2025-26 (अनुमानित)
मध्यम रेशा (Medium Staple)₹7,121 / क्विंटल₹7,710 / क्विंटल
लंबा रेशा (Long Staple)₹7,521 / क्विंटल₹8,110 / क्विंटल
MSP सुरक्षा: यदि बाजार मूल्य MSP से नीचे गिरे तो Cotton Corporation of India (CCI) MSP पर कपास की खरीद करती है। किसान Cott-Ally Mobile App के माध्यम से MSP दरें, निकटतम खरीद केंद्र और अच्छी खेती के तरीके जान सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए SmartKrishi.in पर जाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: कपास की बुवाई का सही समय क्या है?
कपास खरीफ मौसम की फसल है। उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में बुवाई अप्रैल 15 से मई 15 के बीच की जाती है। मध्य भारत (गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश) और दक्षिण भारत (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश) में मानसून आगमन के साथ जून 15 से जुलाई 15 के बीच बुवाई होती है। समय पर बुवाई से कीट-रोग का प्रकोप भी कम होता है।
प्र. 2: कपास की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी है?
कपास के लिए काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी) सर्वोत्तम मानी जाती है जो मध्य और दक्षिण भारत में पाई जाती है। इस मिट्टी में मैग्नेशियम, चूना और कार्बनिक पदार्थ अधिक होते हैं। उत्तर भारत में गहरी जलोढ़ दोमट मिट्टी में भी अच्छी खेती होती है। मिट्टी का pH 6.0 से 8.0 के बीच और जल-निकास उत्तम होना चाहिए।
प्र. 3: कपास का MSP 2024-25 और 2025-26 में कितना है?
सरकार ने 2024-25 के लिए मध्यम रेशा कपास का MSP ₹7,121 प्रति क्विंटल और लंबे रेशे का ₹7,521 प्रति क्विंटल निर्धारित किया। 2025-26 के लिए इसमें क्रमशः 8.3% और 7.8% की वृद्धि करते हुए ₹7,710 और ₹8,110 प्रति क्विंटल किया गया है। Cotton Corporation of India (CCI) MSP पर खरीद करती है।
प्र. 4: Bt कपास और देसी कपास में क्या अंतर है?
Bt कपास एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) किस्म है जिसमें Bacillus thuringiensis का जीन डाला गया है। यह जीन पौधे में एक प्रोटीन बनाता है जो बोलवर्म कीट के लिए हानिकारक होता है। भारत में 90% से अधिक कपास Bt हाइब्रिड से उगाई जाती है। देसी कपास (G. arboreum) परंपरागत किस्में हैं जो सूखा-सहनशील हैं, कम लागत में उगती हैं लेकिन उपज कम देती हैं।
प्र. 5: एक एकड़ कपास की खेती में कितनी लागत और कमाई होती है?
एक एकड़ कपास की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक और मजदूरी मिलाकर लगभग ₹25,000 से ₹35,000 की लागत आती है। अच्छी देखभाल से 8–12 क्विंटल कच्ची कपास (कपास) मिलती है। MSP दर पर ₹56,000 से ₹90,000 तक की आमदनी संभव है। HDPS तकनीक और ड्रिप सिंचाई अपनाकर उपज और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) भारतीय किसानों के लिए एक लाभदायक और महत्वपूर्ण नकदी फसल है। सही किस्म का चुनाव, समय पर बुवाई, संतुलित खाद, IPM आधारित कीट प्रबंधन और MSP का लाभ उठाकर किसान भाई अपनी आय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं।

कपास की खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारी, सरकारी योजनाओं और Kasturi Cotton Branding जैसी पहलों के बारे में अधिक जानने के लिए SmartKrishi.in पर नियमित रूप से विजिट करें। आप Krishak Jagriti – कपास की खेती, BharatAgri – Cotton Farming Tips और Drishti IAS – Cotton Cultivation India भी देख सकते हैं।

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