कपास की खेती कैसे की जाती है (Kapas Ki Kheti Kaise Ki Jati Hai)
कपास (Cotton) भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों (cash crops) में से एक है। इसे “सफेद सोना” (white gold) भी कहा जाता है क्योंकि यह किसानों को अच्छी आय प्रदान करती है। भारत कपास उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। कपास से रुई (cotton fiber), कपड़े, तेल और पशु आहार बनाया जाता है। आइए जानते हैं कि कपास की खेती (kapas ki kheti) कैसे करें।
कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी (Mitti Ka Chunav)
कपास की खेती (cotton farming) के लिए काली मिट्टी (black soil), दोमट मिट्टी (loamy soil) और अच्छी जल निकासी वाली भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी की गहराई 90 सेमी या उससे अधिक होनी चाहिए क्योंकि कपास गहरी जड़ों वाली फसल है। मिट्टी का पीएच स्तर (pH level) 6 से 8.5 के बीच होना चाहिए। हल्की, खारी और जलभराव वाली मिट्टी में कपास की खेती नहीं करनी चाहिए।
कपास की खेती के लिए जलवायु और तापमान (Climate Requirements)
कपास की खेती के लिए गर्म और नम जलवायु (warm and humid climate) की आवश्यकता होती है। बुवाई के समय तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस और कटाई के समय 15 से 25 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त होता है। फसल की वृद्धि के लिए कुल मिलाकर 55 से 100 सेमी वर्षा (rainfall) की आवश्यकता होती है।
कपास की उन्नत किस्में (Kapas Ki Kismen)
बीटी कपास की किस्में (BT Cotton Varieties)
आजकल अधिकांश किसान बीटी कपास (BT cotton) की खेती करते हैं। बीटी कपास में बैसिलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु का जीन होता है जो कीटों से फसल को बचाता है। बीटी कपास दो प्रकार की होती है:
- बीजी-1 (BG-1): चितकबरी इल्ली, गुलाबी सुंडी और अमेरिकन सुंडी के लिए प्रतिरोधी
- बीजी-2 (BG-2): उपरोक्त के अतिरिक्त तंबाकू की इल्ली से भी बचाव करती है
लोकप्रिय बीटी कपास किस्में:
- आरसीएच 134 बीटी (RCH 134 BT)
- आरसीएच 317 बीटी (RCH 317 BT)
- एमआरसी 6304 बीटी (MRC 6304 BT)
- बायोसीड 6588 बीजी-II
देशी और संकर किस्में (Desi and Hybrid Varieties)
- एनएच 651
- एएएच-1
- यूएस 51, यूएस 71
खेत की तैयारी और जुताई (Field Preparation)
कपास की खेती (kapas ki kheti kaise kare) के लिए खेत की अच्छी तैयारी बहुत जरूरी है:
- रबी फसल की कटाई के बाद खेत में पानी (पलेवा) लगाएं
- मिट्टी सूखने पर गहरी जुताई करें क्योंकि कपास की जड़ें 200-250 सेमी गहराई तक जाती हैं
- 10-12 टन गोबर की खाद (farmyard manure) प्रति हेक्टेयर डालें
- 2-3 बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें
- खेत को समतल (leveling) करें
बीज की मात्रा और उपचार (Seed Rate and Treatment)
बीज की मात्रा (Beej Ki Matra)
- देशी किस्में: 15-20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- संकर और बीटी कपास: 4-5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या 900 ग्राम प्रति एकड़
बीज उपचार (Seed Treatment)
बुवाई से पहले बीज का उपचार करना आवश्यक है:
- कवकनाशी (fungicide) से उपचार: ट्राइकोडर्मा विरिडी 4 ग्राम/किग्रा या कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किग्रा
- कीटनाशी से उपचार: इमिडाक्लोप्रिड 7 ग्राम/किग्रा या थायमेथोक्साम 3-4 ग्राम/किग्रा
कपास की बुवाई का समय और विधि (Sowing Time and Method)
बुवाई का सही समय (Best Sowing Time)
कपास की बुवाई (cotton sowing) का उपयुक्त समय मई-जून (May-June) है। अप्रैल महीने में भी बुवाई की जा सकती है।
बुवाई की दूरी (Plant Spacing)
- बीटी कपास के लिए: कतार से कतार 90-120 सेमी और पौधे से पौधे 60-90 सेमी
- अमेरिकन किस्मों के लिए: कतार से कतार 60 सेमी और पौधे से पौधे 45 सेमी
- देशी किस्में: 60×60 सेमी (भारी मिट्टी), 60×45 सेमी (मध्यम मिट्टी)
बीज को 4-5 सेमी की गहराई पर बोना चाहिए।
रिफ्यूजिया (Refugia) लगाना
बीटी कपास के साथ खेत की परिधि पर 20 प्रतिशत क्षेत्र या 5 कतारों में नॉन-बीटी बीज लगाना जरूरी है। इससे कीटों में प्रतिरोधकता विकसित नहीं होती।
खाद और उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management)
आवश्यक पोषक तत्व (Nutrient Requirements)
देशी किस्मों के लिए:
- नाइट्रोजन: 35 किग्रा/एकड़
- फास्फोरस: 12 किग्रा/एकड़
बीटी और संकर किस्मों के लिए:
- नाइट्रोजन: 70 किग्रा/एकड़ (दोगुना)
- फास्फोरस: 24 किग्रा/एकड़ (दोगुना)
खाद देने की विधि
- बुवाई के समय सम्पूर्ण फास्फोरस और पोटाश दें
- नाइट्रोजन को तीन भागों में दें: पहला बुवाई के समय, दूसरा 30-40 दिन बाद, तीसरा फूल आने से पहले
- जिंक सल्फेट 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर (zinc sulfate) का प्रयोग करें
सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management)
कपास की फसल (cotton crop) में सही समय पर सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है:
- पहली सिंचाई: अंकुरण के 20-30 दिन बाद। यह जड़ों को गहरा करने में मदद करती है
- इसके बाद हर 20-25 दिन में सिंचाई करें
- फूल आने के समय और बीजकोष बनते समय पानी की कमी न होने दें
- 33 प्रतिशत टिंडे खिलने के बाद अंतिम सिंचाई करें
कुल सिंचाई: 5-6 बार (बुवाई, खाद डालने और फूल आने के समय)
ड्रिप सिंचाई (drip irrigation): इससे 53 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।
खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)
कपास की खेती में खरपतवार (weeds) नियंत्रण पहले 50-60 दिनों में जरूरी है, वरना उपज में 60-80 प्रतिशत कमी आ सकती है।
नियंत्रण के तरीके:
- बुवाई के 5-6 सप्ताह बाद या पहली सिंचाई से पहले हाथ से गुड़ाई करें
- हर सिंचाई के बाद गुड़ाई करें
- रासायनिक नियंत्रण: बुवाई के बाद पेंडीमेथालिन 25-33 मिली/10 लीटर पानी का छिड़काव करें
कपास में कीट प्रबंधन (Pest Management)
कपास की फसल में कीट (insects) और रोग का प्रकोप आम है। इनका समय पर नियंत्रण जरूरी है।
प्रमुख कीट (Major Pests)
1. गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm):
- कपास का सबसे बड़ा दुश्मन
- टिंडों के अंदर घुसकर बीज खा जाती है
- नियंत्रण: साइपरमेथ्रिन 10 ईसी 10 मिली या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी 10 मिली प्रति 10 लीटर पानी
2. चूसने वाले कीट (Sucking Pests):
- सफेद मक्खी (whitefly)
- माहू/चेपा (aphids)
- जैसिड/फुदका (jassids)
- थ्रिप्स (thrips)
- नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड, थायमेथोक्साम या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें
3. मिली बग (Mealy Bug):
- प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 3 मिली/लीटर या क्यूनालफॉस 25 ईसी 2 मिली/लीटर
जैविक नियंत्रण (Biological Control)
- नीम का तेल (neem oil) 3-5 मिली/लीटर
- ब्यूवेरिया बेसियाना (Beauveria bassiana) 5 ग्राम/लीटर
- टी-आकार का एंटीना लगाएं जिससे पक्षी बैठकर कीड़े खाएं
रोग नियंत्रण (Disease Management)
प्रमुख रोग:
1. मुरझाना/उखटा रोग (Fusarium Wilt):
- बीज उपचार और मिट्टी को ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें
- कार्बेन्डाजिम का ड्रेंचिंग करें
2. पत्ती धब्बा रोग (Alternaria Leaf Spot):
- नियंत्रण: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP या मेटलैक्सिल + मैंकोजेब का छिड़काव
3. जीवाणु झुलसा (Bacterial Blight):
- स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 1 ग्राम + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 20 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी
कपास की चुनाई/तुड़ाई (Harvesting)
कपास 150-200 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जब 50-60 प्रतिशत टिंडे खिल जाएं तो चुनाई शुरू करें।
चुनाई के नियम:
- सुबह ओस खत्म होने के बाद चुनाई करें
- नीचे से ऊपर की ओर चुनाई करें
- 2-3 बार में पूरी फसल की चुनाई करें
- दागी और रंगहीन कपास को अलग रखें
कपास की उपज और आय (Yield and Income)
उपज (Production Per Hectare)
- देशी किस्में: 20-25 क्विंटल/हेक्टेयर
- संकर किस्में: 25-32 क्विंटल/हेक्टेयर
- बीटी कपास: 30-50 क्विंटल/हेक्टेयर
बाजार भाव और आय (Market Price and Income)
कपास का बाजार भाव 5,000-6,000 रुपये प्रति क्विंटल रहता है। बीटी कपास से एक हेक्टेयर में 2-3 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो सकती है।
सहफसली खेती (Intercropping)
कपास के साथ अतिरिक्त लाभ के लिए सहफसली खेती (intercropping) करें:
- मूंग (moong)
- अरहर (pigeon pea)
- मक्का (maize)
- बाजरा (pearl millet)
नोट: भिंडी और अरहर कपास के पास न लगाएं क्योंकि ये कीटों को आकर्षित करते हैं।
कपास की खेती में सावधानियां (Precautions)
- हर साल फसल चक्र (crop rotation) अपनाएं
- कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग न करें
- अनुशंसित मात्रा में ही दवाइयां डालें
- समय पर बुवाई और सिंचाई करें
- खेत को खरपतवार मुक्त रखें
- रोग प्रतिरोधी किस्में लगाएं
निष्कर्ष (Conclusion)
कपास की खेती (kapas ki kheti) भारत के किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय है। सही किस्म का चयन, समय पर बुवाई, उचित खाद और सिंचाई प्रबंधन तथा कीट-रोग नियंत्रण से अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। बीटी कपास की खेती से किसान बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ कमा सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके से खेती करके कपास उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।
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