पपीता की खेती कैसे करें | Papaya Farming
पपीता (Papaya) एक तेजी से बढ़ने वाला और जल्दी फल देने वाला पौधा है। पपीता की खेती (Papaya Cultivation) कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। पपीता पोषक तत्वों से भरपूर फल है जिसमें विटामिन A, C और पाचक एंजाइम पेपेन होता है। पपीता ताजे फल और प्रसंस्कृत उत्पादों दोनों में उपयोग होता है।
जलवायु और तापमान की आवश्यकता
पपीता उष्णकटिबंधीय जलवायु (Tropical Climate) का पौधा है। यह गर्म और आर्द्र मौसम में अच्छी तरह उगता है। 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पपीते की वृद्धि के लिए उत्तम है। पपीता ठंड बर्दाश्त नहीं कर सकता। पाला पड़ने से पौधे मर सकते हैं। अच्छी धूप और 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा पपीते के लिए अनुकूल है।
मिट्टी और भूमि तैयारी
पपीते की खेती के लिए गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी (Well-Drained Loamy Soil) सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का pH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। पपीता जलभराव बिल्कुल सहन नहीं कर सकता। खेत की 2-3 बार जुताई करके समतल बना लें। 50 सेमी × 50 सेमी × 50 सेमी के गड्ढे खोदें और उन्हें गोबर की खाद से भर दें।
पपीते की किस्में
भारत में पपीते की कई उन्नत किस्में (Improved Varieties) उगाई जाती हैं। पूसा डिलीशियस, पूसा ड्वार्फ, पूसा मेजेस्टी, कोयम्बटूर-1, CO-2, ताइवान रेड लेडी, वाशिंगटन और हनीड्यू प्रमुख किस्में हैं। ताइवान रेड लेडी (Taiwan Red Lady) सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक किस्म है जो अधिक उपज देती है। ड्वार्फ किस्में घने रोपण के लिए उपयुक्त हैं।
बीज बोने और रोपाई का समय
पपीते की नर्सरी फरवरी-मार्च या जून-जुलाई में तैयार करें। बीज 15-20 दिन में अंकुरित हो जाते हैं। पौधे 45-60 दिन में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। पौधे से पौधे की दूरी 2 से 2.5 मीटर रखें। हर गड्ढे में 2-3 पौधे लगाएं। फूल आने पर नर पौधों को हटाकर केवल मादा और उभयलिंगी पौधे रखें। एक नर पौधा 10 मादा पौधों के लिए पर्याप्त है।
सिंचाई की व्यवस्था
पपीते को नियमित सिंचाई (Regular Irrigation) की जरूरत होती है। गर्मियों में हर 4-5 दिन और सर्दियों में 7-10 दिन के अंतर पर पानी दें। मिट्टी में नमी बनाए रखना जरूरी है लेकिन जलभराव से बचना चाहिए। ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) सबसे उत्तम विधि है। फूल और फल विकास के समय नियमित पानी देना आवश्यक है।
खाद और उर्वरक
पपीता एक भारी पोषक फसल है। प्रति पौधा 10-15 किलो गोबर की खाद, 200 ग्राम नाइट्रोजन, 200 ग्राम फास्फोरस और 400 ग्राम पोटाश दें। पहली खुराक रोपाई के 2 महीने बाद, दूसरी 4 महीने बाद और तीसरी 6 महीने बाद दें। नाइट्रोजन (Nitrogen) को छोटे भागों में बांटकर हर महीने दें। जैविक खाद और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग फायदेमंद है।
रोग और कीट नियंत्रण
पपीते में पेपाया रिंग स्पॉट वायरस (Papaya Ring Spot Virus – PRSV) सबसे गंभीर रोग है। पाउडरी मिल्ड्यू, डैम्पिंग ऑफ और रूट रॉट अन्य रोग हैं। एफिड, माइट और फल मक्खी प्रमुख कीट हैं। वायरस प्रतिरोधी किस्में लगाएं। एफिड को नियंत्रित करके वायरस फैलने से रोका जा सकता है। नीम का तेल और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़ दें।
फल तोड़ना और उपज
पपीता रोपाई के 9-12 महीने में फल देना शुरू कर देता है। फल जब पीले रंग की धारियां दिखाने लगें तब तोड़ें। हर 3-4 दिन में फल तोड़ते रहें। एक पौधे से 30 से 80 किलो तक उपज (Yield) मिल सकती है। प्रति हेक्टेयर 60 से 100 टन उत्पादन होता है। पपीता साल भर फल देता है। फलों को सावधानी से तोड़ें और छाया में रखें।
विशेष देखभाल
पपीते के पौधों को सहारे की जरूरत होती है खासकर तेज हवा वाले इलाकों में। पौधों के पास खरपतवार (Weeds) न उगने दें। मल्चिंग (Mulching) से मिट्टी में नमी बनी रहती है। फल लगने के बाद ज्यादा भार से तना टूट सकता है इसलिए सहारा दें। पौधों की नियमित निगरानी करें।
आर्थिक लाभ
एक हेक्टेयर में पपीते की खेती में 80,000 से 1 लाख रुपये की लागत आती है। पपीता सिर्फ 9-10 महीने में फल देना शुरू कर देता है। अच्छे प्रबंधन से सालाना 6 से 10 लाख रुपये की आय (Income) हो सकती है। पपीते की खेती अल्पकालिक निवेश में अच्छा मुनाफा देती है। प्रसंस्कृत उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. पपीता कितने महीने में फल देता है?
पपीता रोपाई के 9 से 12 महीने में फल देना शुरू कर देता है। यह सबसे जल्दी फल देने वाले पौधों में से एक है।
2. पपीते में नर और मादा पौधे कैसे पहचानें?
फूल आने पर पहचाना जा सकता है। नर फूल लंबे डंठल पर गुच्छों में आते हैं। मादा फूल तने के पास एकल या छोटे समूह में आते हैं।
3. पपीते की कौन सी किस्म सबसे अच्छी है?
ताइवान रेड लेडी सबसे लोकप्रिय और अधिक उपज देने वाली किस्म है। पूसा डिलीशियस और पूसा ड्वार्फ भी अच्छी किस्में हैं।
4. पपीते में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
पेपाया रिंग स्पॉट वायरस पपीते की सबसे बड़ी समस्या है। वायरस प्रतिरोधी किस्में लगाना और एफिड नियंत्रण इससे बचाव के उपाय हैं।
5. पपीते की खेती में कितना मुनाफा होता है?
अच्छी देखभाल से एक हेक्टेयर से सालाना 6 से 10 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है। यह अल्पकालिक निवेश में अच्छा रिटर्न देता है।